पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की

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उत्तर प्रदेश काडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। ठाकुर को समय से पहले ही सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी और उन्होंने अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश काडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। ठाकुर को समय से पहले ही सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी और उन्होंने अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। अमिताभ ठाकुर ने यहां कहा कि अपने समर्थकों और शुभचिंतकों से विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया है।

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ठाकुर ने कहा कि पार्टी बनाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और उनके नए संगठन का प्रस्तावित नाम ‘अधिकार सेना’ होगा। ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों से पार्टी के उद्देश्य, मिशन और संरचना के साथ नाम सुझाने का भी अनुरोध किया है। इस महीने की शुरुआत में, ठाकुर की पत्नी नूतन ने घोषणा की थी कि वह (अमिताभ ठाकुर) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। नूतन ने आरोप लगाया था, श्री आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कई अलोकतांत्रिक, अनुचित, दमनकारी, परेशान करने वाले और भेदभावपूर्ण कदम उठाए, इसलिए आदित्यनाथ जहां से भी चुनाव लड़ेंगे, वहां से अमिताभ उनके खिलाफ अवश्य ही चुनाव लड़ेंगे।’’ उन्होंने कहा था, यह उनके लिए सिद्धांतों की लड़ाई है और वह गलत कामों का विरोध करेंगे।”

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केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लिए गए एक निर्णय के बाद ठाकुर को 23 मार्च को जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश में ठाकुर के बारे में कहा गया था कि उन्हें अपनी सेवा के शेष कार्यकाल के लिए बनाए रखने के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। ठाकुर का कार्यकाल 2028 में पूरा होने वाला था। ठाकुर ने 2017 में केंद्र से अपना काडर राज्य बदलने का आग्रह किया था। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह पर उन्हें धमकी देने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद अधिकारी को 13 जुलाई 2015 को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने अप्रैल 2016 में उनके निलंबन पर रोक लगा दी और 11 अक्टूबर 2015 से पूरे वेतन के साथ उनकी बहाली का आदेश दिया था।

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