गडकरी ने सुनाया रतन टाटा से जुड़ा किस्सा, RSS में भेदभाव करने का काम नहीं है

गडकरी ने कहा कि एक बार उन्होंने उद्योगपति रतन टाटा से कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने बताा कि जब वह महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री थे।
बीजेपी के एक आम कार्यकर्ता से अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को वैसे तो सड़कों के विकास के लिए जाना जाता है। लेकिन इसके साथ ही उनकी हाजिरजवाबी और मजेदार अंदाज में जवाब देने के कई हिस्सें भी बेहद ही मशहूर हैं। नितिन गडकरी ने एक ऐसे ही रोचक घटना का जिक्र करते हुए बताया जब बिजनेसमैन रतन टाटा को उन्हें समझाना पड़ा था कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। मौका था महाराष्ट्र के पुणे में मल्टी स्पेशिलियटी चैरिटेबल हॉस्पिटल के उद्धाटन का और इस दौरान केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मशहूर उद्योगपति रतन टाटा से जुड़ा एक किस्सा सुनाया।
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गडकरी ने कहा कि एक बार उन्होंने उद्योगपति रतन टाटा से कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने बताा कि जब वह महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री थे। गडकरी ने कहा, ‘‘औरंगाबाद में दिवंगत आरएसएस प्रमुख के बी हेडगेवार के नाम पर एक अस्पताल का उद्घाटन किया जा रहा था। मैं तब राज्य सरकार में एक मंत्री था। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इच्छा व्यक्त की कि अस्पताल का उद्घाटन रतन टाटा करें और मुझसे मदद करने के लिए कहा।’’ गडकरी ने कहा कि इसके बाद उन्होंने टाटा से संपर्क किया और उन्हें देश में गरीबों को कैंसर देखभाल प्रदान करने में टाटा कैंसर अस्पताल के योगदान का हवाला देते हुए अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए राजी किया।
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गडकरी ने कहा, ‘‘अस्पताल पहुंचने पर, टाटा ने पूछा कि क्या यह अस्पताल केवल हिंदू समुदाय के लोगों के लिए है। मैंने उनसे पूछा आप ऐसा क्यों सोचते हैं।’ उन्होंने तुरंत जवाब दिया, क्योंकि यह आरएसएस का है।’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने उनसे कहा कि अस्पताल सभी समुदायों के लिए है और आरएसएस में ऐसा कुछ (धर्म के आधार पर भेदभाव) नहीं होता।’’ गडकरी ने कहा कि फिर उन्होंने टाटा को कई बातें बताईं और बाद में वह बहुत खुश हुए।
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