• Ganesh Chaturthi 2021 : गणेश चतुर्थी पर बाप्पा की बाजारों में ईको फ्रेंडली मूर्तियां की धूम

Rajeev Sharma  Sep 07, 2021 10:48

भाद्रपस मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाते हैं। सभी देवों में प्रथम आराध्य देव श्रीगणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का त्योहार इस साल 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन भगवान गणेश विराजेंगे और 19 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें विदा किया जाएगा।

मेरठ,हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है। भाद्रपस मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाते हैं। सभी देवों में प्रथम आराध्य देव श्रीगणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का त्योहार इस साल 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन भगवान गणेश विराजेंगे और 19 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें विदा किया जाएगा।

मेरठ में भी गणेश चतुर्थी को धूम धाम से मनाने को लेकर तैयारी जोरो शोरो से शुरू हो चुकी है। बाज़ारो और मंदिरो में रौनक दिखने लगी है।भक्तो द्वारा गणेश जी को स्थापित करने के लिए मूर्तियों और पूजा सामग्री की खरीदारी को शुरू कर दिया है।बाज़ारो में भी गणपति की मूर्तियों की बिक्री और त्योहार की अन्य तैयारियां शुरू हो गई हैं। भगवान गणेश की छोटी-बड़ी मूर्तियां भक्तों को मोहित कर रही हैं। अमूमन  11 दिन तक चलने वाले इस पर्व को शहर में कई स्थानों पर मंडप सजाकर मनाया जाता है। इस पर्व पर भक्त घर और मंडप में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर उनकी सेवा करते हैं, और अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। इस बार बाजार में आयी अधिकांश मूर्तियां ईको फ्रेंडली हैं, जो दस मिनट में ही पानी में घुल जाती हैं।

बेगम बाग स्थित शंकर मूर्ति केंद्र के मूर्तिकार शीशराम धनपति ने बताया कि इस साल अधिकतर ईको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की गई हैं। इनसे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है। छह इंच से लेकर साढ़े छह फीट तक की मूर्तियां हाथ से तैयार की गई हैं। इनकी कीमत सौ रुपये से पांच हजार रुपये तक है। मेरठ की बनी मूर्तियां देहरादून, सहारनपुर, गाजियाबाद, दिल्ली तक जा रही हैं।

थापर नगर स्थित साजन मूर्ति कला केंद्र के मूर्तिकार मुकेश पाल का कहना है कि गणोशजी मूर्ति में हर बार की तरह इस बार भी लाल बाग के राजा, दगडू सेठ, अष्टविनायक, अमरावती के गणेश, सिद्धि विनायक, बाल गणेश, टेटूआ गणपति, श्रृंगार गणोश और पगड़ी वाले गणोश की मांग है। चार इंच से लेकर चार फीट तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं।