जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का बड़ा बयान, जनवरी तक फाइनल होगा यूरोपीय संघ और भारत फ्री ट्रेड समझौता

Friedrich Merz
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Jan 12 2026 9:33PM

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार वार्ता अंतिम चरण में है, जिसके जनवरी तक संपन्न होने की उम्मीद है, जिससे 120 अरब यूरो के द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा मिलेगा; हालांकि, बाजार पहुंच और शुल्क जैसे कुछ प्रमुख मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है।

दूनिया के बदलते व्यापार परिदृश्य के बीच भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है। बता दें कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सोमवार को यह संभावना जताई है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता जनवरी के अंत तक अंतिम रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार समीकरणों पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार मर्ज़ ने अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि वार्ता समय पर पूरी होती है तो यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम होगा।

गौरतलब है कि यूरोपीय संघ के अधिकारियों की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत को लेकर सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। वर्षों से लंबित यह व्यापार समझौता भारत और यूरोपीय संघ के लिए चीन और रूस पर निर्भरता कम करने का एक अवसर माना जा रहा है। वर्ष 2024 में भारत-यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 120 अरब यूरो तक पहुंच गया था, जिससे यह समूह भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।

बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में वार्ताओं में तेजी आई है, खासकर तब जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाए और नई दिल्ली पर रूसी तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाया है हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी संवाद टूटने के कारण पिछले वर्ष विफल हो गया था हैं।

इस पृष्ठभूमि में यूरोपीय संघ-भारत समझौता, यूरोप के लिए नए व्यापारिक नेटवर्क बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो हाल ही में दक्षिण अमेरिका के मर्कोसुर समूह के साथ हुए करार के बाद और मजबूत हुई है। वहीं गुजरात में एक अलग कार्यक्रम में भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता लगभग अंतिम चरण में है और जल्द ही ठोस नतीजे सामने आ सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार यूरोपीय संघ कारों, मेडिकल उपकरणों, वाइन और स्पिरिट्स पर शुल्क में बड़ी कटौती चाहता है, जबकि भारत श्रम-प्रधान उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच और अपने ऑटो व इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की तेज मान्यता की मांग कर रहा है। हालांकि स्टील, कार्बन लेवी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर अभी भी कुछ मतभेद बने हुए हैं, जिन पर आगे समझौते की जरूरत बताई जा रही है।

मर्ज़ की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने खनिज, स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े समझौतों पर भी सहमति जताई है हैं। जर्मनी, जो भारत को एक उभरते बाजार के रूप में देखता है, नई दिल्ली से रूसी ऊर्जा और रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने का आग्रह भी कर रहा है हैं। मर्ज़ ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की भूमिका पर सहमति जताते हुए यह भी कहा कि भारत की स्थिति जटिल है और उस पर उंगली उठाना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि मर्ज़ ने चांसलर बनने के बाद अपनी पहली एशियाई यात्रा के लिए भारत को चुना, जो यह संकेत देता है कि यूरोपीय नेतृत्व अब चीन के बजाय भारत पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने दुनिया में बढ़ते संरक्षणवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इससे जर्मनी और भारत दोनों को नुकसान होता है, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया है।

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