UDAN Scheme में सरकार का बड़ा Investment: अगले 10 सालों में खर्च होंगे 28,840 करोड़

Ram Mohan Naidu
ANI
अंकित सिंह । Aug 21 2026 6:12PM

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने अगले 10 वर्षों में UDAN योजना के विस्तार के लिए 28,840 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण सरकारी निवेश की घोषणा की है। यह पहल देश भर में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मज़बूत करने और एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, जिससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में व्यापक सुधार अपेक्षित है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने शुक्रवार को घोषणा की कि भारत सरकार 'उड़ान' (UDAN) रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम का विस्तार करने और देश भर में हवाई कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए अगले 10 वर्षों में लगभग 28,840 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। कर्नाटक के मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए, मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत शुरू की गई इस प्रमुख योजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। 

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नायडू ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में, हमने 'उड़ान' में ज़बरदस्त सफलता हासिल की है। अब हम इसे अगले स्तर पर ले जा रहे हैं, और अगले 10 वर्षों के लिए भारत सरकार लगभग 28,840 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। नायडू ने मैसूर में हुई सिविल एविएशन कंसल्टेटिव कमिटी की बैठक में ये बातें कहीं। इस बैठक में कमिटी के सदस्यों, खासकर सांसदों ने हिस्सा लिया। बैठक में सिविल एविएशन सेक्टर के कई पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें UDAN स्कीम की मौजूदा प्रगति और भविष्य में इसके विस्तार जैसे मुद्दे शामिल थे।

मंत्री ने आगे कहा कि सरकार एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने, कनेक्टिविटी बढ़ाने और एयरपोर्ट्स के कामकाज और मैनेजमेंट को ज़्यादा कुशल बनाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम राज्यों के साथ इस बात पर लगातार चर्चा कर रहे हैं कि अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे बेहतर बनाया जाए, बेहतर कनेक्टिविटी कैसे दी जाए और एयरपोर्ट्स का कामकाज और मैनेजमेंट ज़्यादा कुशलता से कैसे किया जाए। हमने कंसल्टेटिव कमिटी में इन मुद्दों पर चर्चा की है।

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इससे पहले बुधवार को नायडू ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के टर्मिनल 2 पर बने 'ट्रांसशिपमेंट एक्सीलेंस सेंटर' में भारत के ट्रांसशिपमेंट कार्गो सुधार के बड़े स्तर वाले चरण का उद्घाटन किया। इस पहल का मकसद ट्रांसशिपमेंट कार्गो की अनिवार्य री-स्क्रीनिंग को खत्म करके कार्गो के आने-जाने में लगने वाले समय और हैंडलिंग की लागत को कम करना है। इस सुधार के लिए 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' (शुरुआती परीक्षण) 20 जून, 2026 को चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट रूट पर शुरू किया गया था, जिसने औसत एंड-टू-एंड ट्रांजिट समय को 60 घंटे से घटाकर 20 घंटे कर दिया है। इसके शुरू होने के बाद से 280 मीट्रिक टन कार्गो का ट्रांसशिपमेंट किया गया है और एयरक्राफ्ट की क्षमता का इस्तेमाल 75 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत हो गया है।

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