कोई विदेशी प्रभाव नहीं... UPI फीस पर 'बाहरी दबाव' के आरोप का सरकार ने दिया ये जवाब

बयान में कहा गया है कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है। यह गलत है। भारत की UPI पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, और इनका स्पष्ट मकसद एक ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है जो आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती हो।
केंद्र सरकार ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला विदेशी दबाव में लिया गया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए उठाया गया था। इन आरोपों पर स्थिति साफ करते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत की UPI पॉलिसी से जुड़े फैसले "स्वतंत्र रूप से" लिए गए थे और यह ग्राहकों के लिए मुफ्त बनी रहेगी। बयान में कहा गया है कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है। यह गलत है। भारत की UPI पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, और इनका स्पष्ट मकसद एक ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है जो आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती हो।
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नया UPI MDR शुल्क क्या है?
15 अक्टूबर से, 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% का MDR शुल्क लगेगा। हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने कहा है कि इसका भुगतान मर्चेंट करेंगे और ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उदाहरण के लिए, जब किसी व्यापारी को UPI से ₹10,000 का पेमेंट मिलता है, तो उसे ₹40 चुकाने होंगे। जो दुकानदार या संस्था UPI के ज़रिए ग्राहकों से महीने में ₹1 लाख से ज़्यादा का पेमेंट लेती है, उसे 'मर्चेंट' (व्यापारी) माना जाता है। हालांकि, MDR फ़ीस को प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹300 तक सीमित कर दिया गया है। विपक्ष की आलोचना और इसे वापस लेने की मांग के बीच, केंद्र सरकार ने फिर से कहा कि "व्यक्ति-से-व्यक्ति (person-to-person) ट्रांसफ़र" हमेशा मुफ़्त रहेंगे। इसके अलावा, वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मर्चेंट इसका खर्च ग्राहकों पर न डालें। बयान में कहा गया है, दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या QR कोड स्कैन करना - इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
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क्या इस कदम से अमेरिकी कार्ड कंपनियों को फ़ायदा होगा?
हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि इस कदम का मकसद अमेरिकी कार्ड कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाना है। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस कदम को नरेंद्र द्वारा ट्रंप को खुश करने की लगातार कोशिश करार दिया है। रमेश ने ट्वीट किया, "MDR 0.4% क्यों? क्या इसलिए कि डेबिट कार्ड का MDR भी 0.4% है? क्या ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अमेरिकी कार्ड कंपनियां UPI से मुकाबला कर सकें? उन्होंने आगे कहा मोदी सरकार ने ज़ीरो MDR खत्म करने और UPI के लिए चार्ज लगाने की अमेरिकी मांग मान ली है।" अपनी बात को पुख्ता करने के लिए रमेश ने भारत में UPI के मुफ़्त होने पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की पिछली आलोचना का ज़िक्र किया।
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