देश में हर साल 25 लाख लोग Stroke के शिकार, युवाओं में बढ़ा खतरा: Haribhau Bagde

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राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जयपुर में आयोजित न्यूरोलॉजी सम्मेलन में खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में मस्तिष्काघात के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने तनाव कम करने के लिए योग और प्राणायाम के साथ आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर बल दिया।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में हर साल करीब 25 लाख लोग स्ट्रोक यानी मस्तिष्काघात से प्रभावित होते हैं और खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। राज्यपाल ने समय पर रोग की पहचान, विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार और निरंतर अनुसंधान पर जोर दिया। बागडे ने यहां इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (आईएएन) के 33वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।

जयपुर में 21 साल बाद आयोजित हो रहे पांच दिवसीय सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञ मस्तिष्क, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों के निदान, उपचार और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों पर चर्चा कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र शरीर की सबसे जटिल संरचनाओं में शामिल हैं। पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के उपचार में समय पर निदान, निरंतर अनुसंधान और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ के कारण बढ़ता तनाव तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान को जीवनशैली में शामिल करने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के साथ पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता पर भी जोर दिया।

बागडे ने सवाई मानसिंह अस्पताल सहित जोधपुर, कोटा, उदयपुर और बीकानेर के मेडिकल कॉलेजों में न्यूरोलॉजी सेवाओं के विस्तार की सराहना की। आयोजन अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन 1,500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर लोगों को मस्तिष्काघात के शुरुआती लक्षणों की पहचान और तत्काल उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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