जयराम ठाकुर का मनीष सिसोदिया पर पलटवार, बोले- शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कम नहीं है हिमाचल

Jairam Thakur
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वो राजनीतिक मकसद के साथ यहां आए हैं। सुधार किसी भी क्षेत्र में हो अच्छी बात है लेकिन सुधार करना उनका लक्ष्य नहीं है। दिल्ली और हिमाचल की परिस्थितियां बहुत अलग है। उन्होंने कहा कि मैं इतना कहना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कम नहीं है।

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर पलटवार करते हुए कहा कि वो राजनीतिक मकसद के साथ यहां आए हैं। दरअसल, मनीष सिसोदिया ने हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया था। उन्होंने कहा था प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है जहां सरकारी विद्यालयों में बुनियादी संरचना और गुणवत्ता परक शिक्षा नहीं है, वहीं निजी स्कूलों में शुल्क बहुत अधिक है क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें लोगों को लूटने की छूट दे रखी है। 

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शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कम नहीं है हिमाचल

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वो राजनीतिक मकसद के साथ यहां आए हैं। सुधार किसी भी क्षेत्र में हो अच्छी बात है लेकिन सुधार करना उनका लक्ष्य नहीं है। दिल्ली और हिमाचल की परिस्थितियां बहुत अलग है। उन्होंने कहा कि मैं इतना कहना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली से कम नहीं है। यहां कठिन परिस्थितियां है लेकिन हमारे बच्चों की योग्यता पर प्रश्न करना उचित नहीं है।

हिमाचल में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में तमाम राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुटे हुए हैं। जिसको लेकर लगातार हिमाचल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने शिमला में एक सभा को संबोधित किया और जयराम ठाकुर सरकार पर निशाना साधा। 

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भाजपा सरकार पर बरसे सिसोदिया

मनीष सिसोदिया ने जयराम ठाकुर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी गुणवत्ता परक शिक्षा पर भरोसा करती है, वहीं भाजपा दंगों की राजनीति करती है। मनीष सिसोदिया ने कहा था कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है जहां सरकारी विद्यालयों में बुनियादी संरचना और गुणवत्ता परक शिक्षा नहीं है, वहीं निजी स्कूलों में शुल्क बहुत अधिक है क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें लोगों को लूटने की छूट दे रखी है।

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