असम-मिजोरम विवाद के बीच बोले हिमंता बिस्वा सरमा, एक इंच जमीन भी किसी को नहीं दे सकता

असम-मिजोरम विवाद के बीच बोले हिमंता बिस्वा सरमा, एक इंच जमीन भी किसी को नहीं दे सकता

देर रात असम सरकार ने एक बयान में मृतक संख्या में संशोधन किया और कहा कि पांच पुलिसकर्मियों की मौत हुई जबकि 50 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं। असम के कछार जिले के अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष में 10 अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं।

जमीन विवाद को लेकर असम और मिजोरम के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस झड़प में असम पुलिस के 5 जवानों की मौत हुई है जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। इन सबके बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने साफ तौर पर कहा है कि वह एक इंच भी जमीन किसी को नहीं दे सकते। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि मैं ज़मीन की एक इंच भी किसी को नहीं दे सकता, अगर कल संसद एक क़ानून बना दे कि बराक वैली को मिज़ोरम को दिया जाए, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। परन्तु जब तक संसद यह फैसला नहीं लेती, मैं किसी भी व्यक्ति को असम की ज़मीन नहीं लेने दूंगा। उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस मामले की जांच करेगी। इसकी जांच की जाएगी कि नागरिकों को हथियार कहां से मिले।

इससे पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने मारे गए पुलिस अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही साथ वह लगातार मिजोरम पर आरोप लगा रहे हैं। आपकों बता दें कि असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो जाने से राज्य की “संवैधानिक सीमा” की सुरक्षा कर रहे असम पुलिस के कम से कम पांच जवानों की मौत हो गई और एक पुलिस अधीक्षक समेत 60 अन्य घायल हो गए। दोनों पक्षों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे की पुलिस को जिम्मेदार ठहराया और केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि झड़प में छह पुलिसकर्मियों की मौत हुई। 

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बाद में सोमवार देर रात असम सरकार ने एक बयान में मृतक संख्या में संशोधन किया और कहा कि पांच पुलिसकर्मियों की मौत हुई जबकि 50 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं। असम के कछार जिले के अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष में 10 अन्य लोग भी जख्मी हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्रमशः असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों, हिमंत बिस्वा सरमा और जोरमथांगा से बात की और उनसे विवादित सीमा पर शांति सुनिश्चित करने और सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया। अमित शाह ने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत में सीमा विवादों को सुलझाने की आवश्यकता को रेखांकित किया था जिसके दो दिन बाद यह घटना सामने आई है।





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