इंदौर पुलिस मारपीटा घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मांगी रिपोर्ट

  •  दिनेश शुक्ल
  •  अप्रैल 7, 2021   22:37
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इंदौर पुलिस मारपीटा घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मांगी रिपोर्ट

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर लिखा कि कोरोना नियमों को लागू करने की आड़ में इस तरह की शर्मनाक अमानवीयता देश को स्वीकार नहीं! सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही अत्याचार करें तो जनता कहाँ जाये? तो वही अब मानव अधिकार आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।

भोपाल। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने इंदौर शहर में पुलिस द्वारा मास्क नहीं लगाने पर एक रिक्शा चालक की उसके बेटे के सामने पिटाई पर संज्ञान लिया है। इस मामले में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने पुलिस महानिरीक्षक, इन्दौर से दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। तो दूसरी तरफ इस घटना को लेकर कांग्रेस पार्टी भी हमलावर हो गई है। इंदौर  में पुलिसकर्मीयों द्वारा बेरहमी से मारपीट किए जाने को लेकर जहाँ पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने ट्वीट कर लिखा कि इंदौर में मास्क नहीं लगाने पर पुलिस द्वारा इस प्रकार से मारपीट दर्शा रही है कि शिवराज सरकार डंडे के बल पर कोरोना से लड़ना चाहती है..।

 

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दरआसल इंदौर शहर के परदेशीपुरा इलाके में मंगलवार को मास्क नहीं लगाने की बात पर दो पुलिस जवानों ने ऑटो रिक्शा चालक कृष्णकांत को रोका और कार्रवाई की, तो विवाद हो गया। जवानों ने उसे घेरकर सड़क पर पटका और बेरहमी से पीट दिया। इस दौरान उसका 11 साल का बेटा अपने पिता को छोड़ देने के लिये गिड़गिड़ाता रहा। फिर भी दोनों जवान नहीं माने। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने दोनों जवानों को सस्पेंड कर एसपी ऑफिस इन्दौर में अटैच कर दिया है। वहीं, सीएसपी परदेशीपुरा को मामले की जांच सौंपी है। इन्दौर पुलिस के मुताबिक, कृष्णकांत स्मैक का नशा करता है। उसके खिलाफ अपने ही परिवार के लोगों पर चाकू से हमला करने के दो केस हैं। कृष्णकांत को धारा 110 के तहत कार्रवाई कर छोड़ दिया गया है।

 

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जिसको लेकर जहां प्रदेश कांग्रेस नेताओं मोर्चा खोलते हुए इस घटना की निंदा की वही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निरंकुश नौकरशाही के आरोप लगाए। वही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर लिखा कि कोरोना नियमों को लागू करने की आड़ में इस तरह की शर्मनाक अमानवीयता देश को स्वीकार नहीं! सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही अत्याचार करें तो जनता कहाँ जाये? तो वही अब मानव अधिकार आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। 





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