IIT Indore ने बनाया AI टूल HGAST, स्पीच ट्रांसलेशन में सुधारेगा जेंडर की गलतियां

इंदौर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं ने आवाज के अनुवाद में पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के अंतर को सही करने के लिए नया एआई टूल एचजीएएसटी विकसित किया है। यह टूल अंग्रेजी से हिन्दी, मराठी और गुजराती में रूपांतरण के दौरान वक्ता की आवाज और वाक्य संरचना का विश्लेषण कर सही क्रिया रूप तय करता है।
अंग्रेजी में ‘आई वेंट टू द मार्केट’ कहने वाला पुरुष हो या महिला, वाक्य एक ही रहता है, लेकिन हिन्दी में इसका अनुवाद पुरुष वक्ता के लिए ‘मैं बाजार गया’ और महिला वक्ता के लिए ‘मैं बाजार गई’ हो जाता है। अंग्रेजी में बोले गए वाक्यों के हिन्दी, मराठी और गुजराती भाषाओं में अनुवाद के वक्त पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के ऐसे ही अंतर को पहचानकर गलतियां दुरुस्त करने के लिए इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का नया टूल विकसित किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस टूल को ‘हाइरार्किकल जेंडर आर्बिट्रेशन फॉर स्पीच ट्रांसलेशन (एचजीएएसटी)’ नाम दिया गया है।
आईआईटी के कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रेश कुमार मौर्य के नेतृत्व में तैयार टूल एआई की मौजूदा अनुवाद प्रणालियों को बदलने के बजाय उनके ऊपर एक ‘सुधार परत’ के रूप में कार्य करता है और अनुवादित परिणाम की जांच करके आवश्यक सुधार करता है। खास बात यह है कि एचजीएएसटी के इस्तेमाल के लिए मौजूदा अनुवाद प्रणालियों को धन और समय खर्च करके दोबारा प्रशिक्षित करने की आवश्यकता नहीं होती और टूल को इन प्रणालियों में आसानी से जोड़ा जा सकता है। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक एआई की अनुवाद प्रणालियों को अक्सर ऐसे डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है जिनमें शब्दों के पुरुषवाचक रूपों को प्राथमिकता मिलती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में जब कोई महिला अंग्रेजी में बोलती है और उसके शब्दों का हिन्दी, मराठी या गुजराती में अनुवाद किया जाता है, तो एआई अक्सर पुरुषवाचक क्रिया-रूपों का प्रयोग कर देता है। नतीजतन महिला वक्ता की वास्तविक पहचान अनुवाद में नहीं दिख पाती।’’ अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि एचजीएएसटी वक्ता की आवाज सुनकर शब्दों के पुल्लिंग और स्त्रीलिंग की पहचान करता है और वाक्य संरचना का विश्लेषण करके तय करता है कि क्रिया का रूप किस लिंग के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद प्रत्येक सुधार की दोबारा जांच की जाती है ताकि वाक्य के वास्तविक अर्थ, लंबाई या व्याकरण में कोई भी परिवर्तन न हो।
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत में लोग आवाज के अनुवाद के लिए एआई पर निर्भर हो रहे हैं, बुनियादी स्तर पर अनुवाद की सटीकता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो गया है।’’ अनुसंधानकर्ताओं ने अंग्रेजी से हिन्दी, अंग्रेजी से मराठी और अंग्रेजी से गुजराती अनुवादों पर एचजीएएसटी का परीक्षण किया। इसके लिए तीन अलग-अलग मौजूदा अनुवाद प्रणालियों का उपयोग किया गया। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार एचजीएएसटी ने पुरुष वक्ताओं के लिए 99 से 100 प्रतिशत सटीकता बनाए रखी, जबकि महिला वक्ताओं के लिए सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
महिला वक्ताओं के मामले में सटीकता हिन्दी में 83.15 प्रतिशत से बढ़कर 98.88 प्रतिशत, गुजराती में 73 से 76 प्रतिशत से बढ़कर 96 से 97 प्रतिशत और मराठी में 90 से 93 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो गई।
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