भारत बना दुनिया का सबसे गर्म देश! 100 सबसे गर्म शहर India में, तपती गर्मी और लू से हर किसी का जीना मुहाल

पूर्वी भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। आसनसोल और दुर्गापुर में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि धनबाद में पारा 44 डिग्री दर्ज किया गया। नई दिल्ली वैश्विक सूची में 99वें और फरीदाबाद 100वें स्थान पर रहे, जहां तापमान 44 डिग्री रहा।
पूरा देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और उत्तर, मध्य तथा पूर्वी भारत के अनेक हिस्सों में तापमान लगातार नए कीर्तिमान बना रहा है। मंगलवार दोपहर को भी भारत ने वैश्विक तापमान चार्ट पर अपना दबदबा बरकरार रखा। दोपहर करीब 2:30 बजे AQI.in की लाइव तापमान रैंकिंग के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से सभी भारत में ही स्थित थे। यह देश भर में जारी भीषण गर्मी की लहर की तीव्रता और व्यापकता को रेखांकित करता है। रैंकिंग से पता चला कि दोपहर होते-होते तापमान में और वृद्धि हुई, यहां तक कि सूची में सबसे नीचे के शहरों में भी भीषण गर्मी दर्ज की गई, और यहां भी तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे स्पष्ट है कि गर्मी का दायरा कितना व्यापक हो चुका है।
इस सूची में केवल छोटे कस्बे ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख शहर भी शामिल रहे। नई दिल्ली, फरीदाबाद, चंडीगढ़, जम्मू, आगरा, अयोध्या, ग्वालियर, कोटा और रायपुर जैसे शहरों में भीषण लू का असर दिखाई दिया। दोपहर तक चंडीगढ़, जम्मू, बठिंडा, पठानकोट, बरेली, झांसी, कैथल और हरिद्वार जैसे कई शहर 46 डिग्री तापमान के दायरे में पहुंच गए थे। वहीं उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के अनेक शहरों में तापमान 45 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया।
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पूर्वी भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। आसनसोल और दुर्गापुर में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि धनबाद में पारा 44 डिग्री दर्ज किया गया। नई दिल्ली वैश्विक सूची में 99वें और फरीदाबाद 100वें स्थान पर रहे, जहां तापमान 44 डिग्री रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि लू अब केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के व्यापक भूभाग को अपनी चपेट में ले चुकी है।
भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी राहत की संभावना कम बताई है। विभाग के अनुसार राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश और विदर्भ में इस सप्ताह लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रह सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 24 मई तक तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 मई तक गंभीर गर्मी की चेतावनी जारी की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की गर्मी सामान्य मौसमी चक्र से कहीं अधिक खतरनाक बनती जा रही है। बेंगलुरु स्थित तक्षशिला संस्थान के भूस्थानिक अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रोफेसर वाई नित्यानंदम का कहना है कि अप्रैल और मई में उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में अधिक गर्मी होना सामान्य बात है, क्योंकि इस समय तेज सौर विकिरण, शुष्क हवाएं और मिट्टी में नमी की कमी रहती है। लेकिन इस वर्ष चिंता का विषय गर्मी की तीव्रता, लंबे समय तक बने रहना और उसका अत्यधिक व्यापक फैलाव है। रात के समय भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिल रही, जिससे हालात और गंभीर हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कम वर्षा, लगातार शुष्क वायु प्रवाह, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और हरित क्षेत्र में कमी ने स्थिति को और विकट बना दिया है। जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को कई गुना बढ़ा रहा है। अब लू की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार, अधिक समय तक और ज्यादा तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं।
भीषण गर्मी का असर देश की बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को देश में बिजली की मांग नया रिकार्ड बनाते हुए 260 गीगावाट तक पहुंच गई। इससे पहले सोमवार को मांग 258 गीगावाट दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा अप्रैल में बने 256 गीगावाट के पुराने रिकार्ड से भी अधिक है। बिजली की बढ़ती मांग का मुख्य कारण घरों और दफ्तरों में तेजी से बढ़ता शीतलन उपकरणों का उपयोग माना जा रहा है।
राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को दोपहर तीन बजकर तेइस मिनट पर जब मांग चरम पर पहुंची, तब तापीय बिजली संयंत्रों ने सबसे अधिक 157.2 गीगावाट बिजली उपलब्ध कराई। इसके अलावा सौर ऊर्जा से 61.3 गीगावाट, जल विद्युत से 14.8 गीगावाट और पवन ऊर्जा से 13.5 गीगावाट बिजली मिली।
उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस गर्मी में विशेष रूप से चर्चा में है। बुंदेलखंड क्षेत्र का यह जिला पिछले एक महीने में दो बार दुनिया का सबसे गर्म शहर और तीन बार एशिया का सबसे गर्म स्थान बन चुका है। सोमवार को यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 75 वर्षों में मई महीने का सबसे अधिक तापमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि बांदा केवल मौसमीय कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियों के कारण भी अत्यधिक गर्म हो रहा है। लगातार घटती हरियाली, सूखती नदियां, पत्थरीली जमीन और रेत खनन ने इसे कृत्रिम गर्म द्वीप में बदल दिया है।
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