Gulf के हालात को देखते हुए India सतर्क, PM Modi ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, लिये गये कई बड़े फैसले

अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए यूएई की ओर सैकड़ों मिसाइल दागे। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन यूएई पर हमलों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य बताया।
पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से बातचीत कर यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र के किसी नेता से प्रधानमंत्री की यह पहली बातचीत थी। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान कहा कि यूएई पर हुए हमले निंदनीय हैं और भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने हमलों में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। साथ ही यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए राष्ट्रपति का आभार जताया।
हम आपको बता दें कि अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए यूएई की ओर सैकड़ों मिसाइल दागे। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन यूएई पर हमलों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य बताया। साथ ही कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भी पश्चिम एशिया के हालात को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने चर्चा की। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी चर्चा की और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बातचीत की।
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इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद के सभी सदस्य देशों कुवैत, बहरीन, यूएई, कतर, सऊदी अरब और ओमान के अपने समकक्षों से संपर्क साधा। उन्होंने क्षेत्र में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर भारत की चिंताएं साझा कीं और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलता पर चर्चा की।
रविवार देर रात दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति यानि सीसीएस की बैठक की अध्यक्षता भी की। यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई है। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, भारत के सामरिक हितों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विस्तार से विचार किया गया।
क्षेत्र में हवाई क्षेत्र बंद होने और सड़क मार्ग असुरक्षित माने जाने के कारण भारत सरकार ने ईरान और अन्य प्रभावित इलाकों में रह रहे भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, किसी भी संभावित निकासी अभियान को अंजाम देना अत्यंत जटिल होगा क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक फैले हुए हैं।
भारत को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हवाई हमले कम होंगे, हालांकि रविवार को खामेनेई की मौत के बाद हमलों में तेजी आई। यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि ईरानी हमले में एक भारतीय नागरिक घायल हुआ है, लेकिन उसकी हालत खतरे से बाहर है और उसे अस्पताल में आवश्यक सहायता मिल रही है।
दूसरी ओर, भारत में ईरानी दूतावास ने विश्व भर की स्वतंत्र और स्वतंत्रता समर्थक सरकारों से खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा करने और कथित अराजकता व आक्रामकता के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। हालांकि अभी तक भारत की ओर से खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त नहीं किया गया है। रूस और चीन उन कुछ देशों में शामिल रहे जिन्होंने इस घटना की निंदा की या संवेदना प्रकट की।
देखा जाये तो वर्तमान संकट ने भारत को कूटनीतिक संतुलन साधने की चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। एक ओर भारत के अमेरिका और इजराइल के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, तो दूसरी ओर ईरान के साथ भी उसके पारंपरिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं। इसी संतुलन का संकेत भारत के उस बयान में भी दिखा, जिसमें उसने सभी देशों से संयम बरतने और संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की अपील की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बहाली, ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी। खाड़ी में जारी तनाव का प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और प्रवासी भारतीयों की आजीविका पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नई दिल्ली की नजर हर घटनाक्रम पर बनी हुई है और वह परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाने की तैयारी में है।
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