Indore में Elephant Attack से चालक की मौत मामले में महावत और मालिक पर केस दर्ज

मध्य प्रदेश के इंदौर में हथिनी के हमले में ऑटो चालक की मौत के मामले में वन विभाग ने महावत और मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। डीएफओ के अनुसार 26 वर्षीय हथिनी को बिना आवश्यक अनुमति के इंदौर जिला सीमा में लाया गया था। पुलिस पहले ही महावत के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर चुकी है।
इंदौर में हथिनी के हमले में एक ऑटो-रिक्शा चालक की मौत के पांच दिन बाद वन विभाग ने शुक्रवार को बिना आवश्यक अनुमति के इस पशु को जिले की सीमा में लाने के आरोप में महावत और उसके मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया। विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) लाल सुधाकर सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 26 वर्षीय हथिनी वन विभाग में पंजीकृत है, लेकिन उसे इंदौर जिले की सीमा में लाने के लिए विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
उन्होंने कहा कि हथिनी के महावत उमेश गोस्वामी और इस पशु के मालिक संदीप निर्मोही के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 48ए (बिना अनुमति वन्यजीव का परिवहन) और अन्य संबद्ध प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। डीएफओ ने बताया कि शुरुआती जांच के अनुसार हथिनी का पंजीकरण बिहार का है, जबकि उसे फिलहाल उज्जैन में रखा गया है। उन्होंने बताया, ‘‘महावत ने पूछताछ में बताया कि हथिनी को तेलंगाना में एक धार्मिक कार्यक्रम से ट्रक के जरिये वापस उज्जैन लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ट्रक खराब होने के बाद उसे पैदल इंदौर लाया गया।
इंदौर जिले में उसके प्रवेश के लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।’’ डीएफओ ने बताया कि घटना के सीसीटीवी फुटेज से प्रतीत होता है कि हथिनी बार-बार अपनी सूंड हिलाकर ऑटो-रिक्शा चालक को सामने से हट जाने का संकेत दे रही थी, जब वह उसे गुड़ खिलाने पहुंचा था। उन्होंने कहा, ‘‘यदि इस पशु के ऐसे संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए, तो हादसों से बचा जा सकता है।’’ पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 26 जुलाई को इंदौर के राजनगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा चालक विजय होलकर (49) हथिनी को गुड़ खिलाने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि हथिनी ने होलकर को सूंड से पटकने के बाद कुचल दिया और उपचार के दौरान ऑटो-रिक्शा चालक की मौत हो गई।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस इस घटना को लेकर महावत उमेश गोस्वामी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु) और धारा 291 (पशु के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण) के तहत प्राथमिकी पहले ही दर्ज कर चुकी है।
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