Indore water contamination | इंदौर दूषित पानी से मौत का तांड़व! 13 लोगों की मौत हुई, दो अधिकारी सस्पेंड, एक बर्खास्त

इंदौर में दूषित पानी से 13 लोगों की मौत के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश पर दो नगर निगम अधिकारियों को निलंबित और एक को बर्खास्त किया गया है, जो सरकारी लापरवाही के प्रति कठोर कार्रवाई का संकेत है। भागीरथपुरा में जलापूर्ति लाइन के लीकेज और उसके ऊपर बने शौचालय को प्राथमिक कारण माना जा रहा है, और विस्तृत जांच के लिए IAS अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुए आउटब्रेक में मरने वालों की संख्या 13 होने के बाद दो नगर निगम अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और एक को नौकरी से निकाल दिया है। मरने वालों में एक छह महीने का बच्चा और छह महिलाएं शामिल हैं। इंदौर के एक व्यक्ति ने बुधवार को दावा किया कि दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण उसके छह माह के बेटे की दो दिन पहले मौत हो गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से बीमार होने के बाद हफ्ते भर में 13 लोग दम तोड़ चुके हैं जिनमें छह माह का बच्चा और छह महिलाएं शामिल हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप को ‘आपात स्थिति जैसा’ बताते हुए बुधवार को कहा कि इस घटना के दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। यादव शहर के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे और उल्टी-दस्त के मरीजों के हाल-चाल जाने। इसके बाद उन्होंने दूषित पेयजल कांड से पैदा हालात की उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा की। बैठक के बाद यादव ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें दूषित पेयजल कांड में चार लोगों की मौत की जानकारी दी गई है।
इसे भी पढ़ें: India-Pak में जंग, अमेरिका के खुलासे ने हिला दी दुनिया, 25 करोड़ पाकिस्तानियों के पैरों तले खिसकी जमीन
मुख्यमंत्री ने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लोगों द्वारा दूषित पेयजल के सेवन से फैला उल्टी-दस्त का प्रकोप ‘आपात स्थिति’ की तरह था, लेकिन सरकारी तंत्र के समन्वित प्रयासों से कई मरीजों को वक्त पर इलाज मिलने के कारण उनकी हालत में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। हम घटना के दोषियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई करने को तैयार हैं। मैंने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे शहर के सभी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर की लाइन के लीकेज से जुड़ी शिकायतों की ठीक तरह जांच करके जरूरी प्रबंध करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।’’
प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भागीरथपुरा में नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक सहायक इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और एक प्रभारी सब इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। यादव ने बताया, ‘‘शुरुआती जांच के आधार पर नगर निगम के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर आगामी कदम उठाए जाएंगे।’’
इसे भी पढ़ें: Nushrratt Bharuccha ने किये महाकाल के दर्शन तो भड़क गये Maulana Shahabuddin Razvi, जारी कर दिया फतवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम में सरकारी अमले की कमी दूर करने के लिए नयी नियुक्तियां की जाएंगी। यादव ने यह भी बताया कि भागीरथपुरा में करीब 40,000 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई है जिनमें उल्टी-दस्त के 2,456 संदिग्ध मरीज मिले हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद 212 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया जिनमें से 50 लोगों को स्वस्थ होने के कारण छुट्टी दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया, ‘‘फिलहाल 162 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से लगभग सबकी हालत स्थिर है।’’ अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में जलापूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला है जिसके ऊपर एक शौचालय बना है। उन्होंने कहा कि संभवतः इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुआ। अधिकारियों ने बताया कि दूषित पेयजल कांड की जांच के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति गठित की गई है।
अन्य न्यूज़











