TMC में घमासान! Kakoli Ghosh का बड़ा इनकार, बोलीं- Mamata को Letter लिखने की खबर झूठी।

पत्र में कहा गया, पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ कुछ रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों - जिसमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर ('चिकन्स नेक') क्षेत्र भी शामिल है - में भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा मांगी गई जमीन आवंटित न किए जाने को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने शुक्रवार को इस बात से इनकार किया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को कोई पत्र लिखकर पूर्व राज्यसभा सदस्य इमरान के खिलाफ जांच की मांग की हो। यह आरोप लगाया गया था कि इमरान के बांग्लादेश में सक्रिय चरमपंथी समूहों से संबंध हैं। उन्होंने एक्स पर कहा कि मैंने पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री को किसी भी मुद्दे पर कोई पत्र नहीं लिखा है, जैसा कि मीडिया में फैलाया जा रहा है। मैं इस खबर से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करती हूं। इससे पहले खबर आई थी कि दस्तीदार ने इमरान के खिलाफ अधिकारी और विदेश मंत्री (EAM) डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया था कि इमरान, जिन्हें पूर्व टीएमसी सरकार के समर्थन से उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए नामित किया गया था, उनके चरमपंथी समूहों से संबंध हैं।
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पत्र में कहा गया, पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ कुछ रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों - जिसमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर ('चिकन्स नेक') क्षेत्र भी शामिल है - में भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा मांगी गई जमीन आवंटित न किए जाने को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। इन फैसलों से जुड़े हालात राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से बारीकी से जांच किए जाने के हकदार हैं। खास बात यह है कि काकोली लोकसभा में बागी गुट की अगुवाई कर रही हैं और उन 19 सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने ममता के खिलाफ स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी है। इससे पहले, उन्होंने TMC के सीनियर नेता कल्याण बनर्जी पर महिलाओं के प्रति गलत सोच रखने और निचले सदन में उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप भी लगाया था और बिरला से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि, ममता के करीबी कल्याण ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि काकोली को इस घटना के बारे में तुरंत बताना चाहिए था।
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TMC के संकट की बात करें तो ममता की पार्टी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है, क्योंकि उसे लोकसभा, राज्यसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा में बगावत का सामना करना पड़ रहा है। जहां काकोली लोकसभा में बगावत की अगुवाई कर रही हैं, वहीं पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में बगावत का नेतृत्व कर रहे हैं। रिताब्रत को सदन में विपक्ष का नेता भी घोषित किया गया है और उन्हें 80 में से 64 TMC विधायकों का समर्थन हासिल है।
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