कर्नाटक में उभरे संकट का दिखा मध्य प्रदेश पर असर, 17 जुलाई को फिर होगी बैठक

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 15 2019 9:57AM
कर्नाटक में उभरे संकट का दिखा मध्य प्रदेश पर असर, 17 जुलाई को फिर होगी बैठक
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माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ जनता दल (एस)-कांग्रेस गठबंधन के एक दर्जन से अधिक विधायकों के इस्तीफे से उत्पन्न संकट एवं गोवा में 10 कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मद्देनजर चौकस हुए कमलनाथ ने मध्य प्रदेश भाजपा द्वारा उनकी सरकार को गिराने की आशंकाओं के बीच यह बैठक बुलाई है।

भोपाल। कांग्रेस नीत मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी पार्टी के विधायकों एवं अपनी सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायकों की 17 जुलाई को फिर से बैठक बुलाई है। मात्र 11 दिन में इन विधायकों की यह तीसरी बैठक होगी। माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ जनता दल (एस)-कांग्रेस गठबंधन के एक दर्जन से अधिक विधायकों के इस्तीफे से उत्पन्न संकट एवं गोवा में 10 कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मद्देनजर चौकस हुए कमलनाथ ने मध्य प्रदेश भाजपा द्वारा उनकी सरकार को गिराने की आशंकाओं के बीच यह बैठक बुलाई है। इससे पहले, कमलनाथ ने अपनी पार्टी कांग्रेस सहित सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायकों से मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र में सदन की कार्यवाही के दौरान हमेशा मौजूद रहने के निर्देश दिए थे, ताकि बेवजह सरकार संकट में न आए।

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बसपा की विधायक रामबाई सिंह ने रविवार को बताया कि हां, मुझे 17 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास पर विधायकों की बैठक में बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस के साथ हूं, विशेष रूप से कमलनाथ जी के साथ। मैं उनकी सरकार को समर्थन जारी रखूंगी। इससे पहले, सात जुलाई एवं 11 जुलाई को इन विधायकों की बैठक और डिनर हो चुकी है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, कमलनाथ ने अपने निवास पर कांग्रेस विधायक दल की सात जुलाई की रात हुई बैठक में अपनी पार्टी के सभी विधायकों एवं उनकी सरकार को समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी एवं निर्दलीय विधायकों को साफ-साफ कहा था कि वे सभी इस मानसून सत्र में सदन में हमेशा उपस्थित रहें। इस बैठक में उनकी सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायक भी शामिल हुए थे।

कमलनाथ को संभवत: इस बात का डर है कि इस सत्र में बजट पेश होने के बाद भाजपा वित्तीय मामलों सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर कभी भी वोटिंग की मांग करने का ‘गेम प्लान’ कर सकती है और यदि उस वक्त सदन में हमारे पर्याप्त सदस्य मौजूद नहीं रहे, तो इससे हमारी सरकार बेवजह संकट में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने पार्टी के विधायकों एवं सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायकों का मूड जानने के लिए भोपाल में 11 जुलाई को डिनर किया था। ठीक इसी तरह से मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने आठ जुलाई की रात हुई प्रदेश भाजपा विधायक दल की बैठक में कहा, ‘भाजपा के विधायक सदन में पूरी संख्या में हमेशा मौजूद रहें।’



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इसके अलावा, इन दोनों नेताओं ने कहा कि पार्टी विधायक पूरी ताकत, अध्ययन और ऊर्जा के साथ जन समस्याओं से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाएं। वे मुखर रहें और सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दें। जनता की आवाज को इतने ताकत और इस तरीके से मुद्दों पर आधारित विरोध करें कि जनता को इसका असली चेहरा समझ में आ जाए। मालूम हो कि मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, इनमें से 114 कांग्रेस के कब्जे में हैं जबकि 108 भाजपा, दो बसपा, एक सपा एवं चार निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट वर्तमान में खाली है। बहुत ही कम संख्या में बहुमत होने के कारण भाजपा प्रदेश सरकार पर कभी भी गिरने का तंज कसती रहती है। वहीं, कांग्रेस कहती है कि हमारी सरकार पूरे पांच साल चलेगी।

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