Prabhasakshi's Newsroom । कांग्रेस के हुए कन्हैया मगर जिग्नेश नहीं हो पाए शामिल, बोले- वैचारिक तौर पर साथ हूं

Prabhasakshi's Newsroom । कांग्रेस के हुए कन्हैया मगर जिग्नेश नहीं हो पाए शामिल, बोले- वैचारिक तौर पर साथ हूं

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए। वहीं गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी तकनीकी कारणों से पार्टी की सदस्यता नहीं ले पाए लेकिन उन्होंने कहा कि मैं वैचारिक तौर पर कांग्रेस का हो गया हूं।

राहुल गांधी की मौजूदगी में कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी कांग्रेस में शामिल हो गए। इसी दौरान कन्हैया कुमार ने महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में वैचारिक संघर्ष छिड़ा हुआ है। ये आपातकाल का समय है। वहीं बात पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान की करेंगे। सिद्धू के इस्तीफे के बाद अमरिंदर सिंह का बयान सामने आया है और अंत में बात बिहार की होगी। 

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कांग्रेस में शामिल हुए दो युवा

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए। वहीं गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी तकनीकी कारणों से पार्टी की सदस्यता नहीं ले पाए लेकिन उन्होंने कहा कि मैं वैचारिक तौर पर कांग्रेस का हो गया हूं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर इन दोनों युवा नेताओं ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में देश की सबसे पुरानी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंसमें दोनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया।

बिहार से ताल्लुक रखने वाले कन्हैया जेएनयू में कथित तौर पर देशविरोधी नारेबाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए थे। वह पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ भाकपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे थे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

दूसरी तरफ दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले जिग्नेश गुजरात के वडगाम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। 

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स्थिर व्यक्ति नहीं हैं सिद्धू

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद आलानेतृत्व पर तंज कसा। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उन्होंने पहले ही बता दिया था कि सिद्धू स्थिर व्यक्ति नहीं हैं। और सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए वह उपयुक्त नहीं है। दरअसल सिद्धू ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वह पंजाब को लेकर समझौता नहीं कर सकते। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे।

वहीं आम आदमी पार्टी ने दावा किया कि सिद्धू ने इसलिए पद से इस्तीफा दिया क्योंकि वह इस बात को ‘स्वीकार नहीं कर पाए’ कि एक दलित को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। राज्य में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह दिखाता है कि नवजोत सिंह सिद्धू दलितों के खिलाफ हैं। एक गरीब बेटा मुख्यमंत्री बना... यह, सिद्धू बर्दाश्त नहीं कर सके। यह बहुत दुखद है।

ललन सिंह की नयी टीम

जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन ने पार्टी की नई टीम का गठन कर दिया है। इनमें कुछ नए चेहरे को शामिल किया गया है। जबकि ज्यादातर चेहरे पुराने हैं। इस नई टीम में राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने केसी त्‍यागी को फिर राष्ट्रीय प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा को पहले की तरह संसदीय दल का अध्यक्ष, गोपालगंज के सांसद डॉ आलोक कुमार सुमन को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि नयी टीम में आरसीपी सिंह को जगह नहीं मिली।





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