कर्नाटक में राजभवन बनाम सरकार: राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बीच में छोड़ा अभिभाषण, सदन से किया वॉकआउट

कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार के असेंबली में दिए जाने वाले पारंपरिक भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रस्तावित G RAM G बिल को लागू करने से जुड़े हिस्सों पर आपत्ति जताई और सदन से बाहर चले गए।
कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार के असेंबली में दिए जाने वाले पारंपरिक भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रस्तावित G RAM G बिल को लागू करने से जुड़े हिस्सों पर आपत्ति जताई और सदन से बाहर चले गए। यह राजभवन और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच एक नया राजनीतिक टकराव है।
इसे भी पढ़ें: ईरान में हालात बेकाबू, प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग, 250 से ज्यादा मस्जिदों को किया आग के हवाले
यह घटना बजट सत्र की शुरुआत में हुई, जब गवर्नर को सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को बताते हुए भाषण देना था। गहलोत ने MGNREGA योजना में बदलाव लाने वाले विवादास्पद कानून से जुड़े कुछ खास पैराग्राफ पर आपत्ति जताई, और कहा कि यह भाषण सरकारी प्रोपेगेंडा जैसा है।
इसे भी पढ़ें: जिसके पास कम शक्ति है, उसकी Power ईमानदारी है...दावोस में ट्रंप के सामने कार्नी ने ऐसा क्या कहा? लोग खड़े होकर बजाने लगे तालियां
गवर्नर का यह कदम तमिलनाडु के गवर्नर आर एन रवि के राज्य असेंबली में भाषण दिए बिना बाहर चले जाने के एक दिन बाद आया है, जिन्होंने टेक्स्ट में "गलतियों" का हवाला दिया था। केरल में भी, गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कथित तौर पर अपने भाषण के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था, और राजभवन ने दावा किया कि उनके सुझाए गए बदलावों को ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था।
राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
यह घटना राजभवन और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच चल रहे लंबे शीतयुद्ध का ताज़ा अध्याय है। इससे पहले भी 'मुडा' (MUDA) घोटाले और अन्य प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर राज्यपाल और सरकार के बीच तीखी बयानबाजी हो चुकी है। कांग्रेस सरकार ने राज्यपाल पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है, जबकि राजभवन ने संवैधानिक मर्यादाओं का हवाला दिया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
सत्ता पक्ष: कांग्रेस नेताओं ने इसे संवैधानिक परंपराओं का अपमान बताया है। उनका कहना है कि राज्यपाल को सरकार द्वारा तैयार किया गया अभिभाषण पढ़ने के लिए बाध्य होना चाहिए।
विपक्ष (BJP): भाजपा ने राज्यपाल के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार असंवैधानिक विधेयकों को राज्यपाल के जरिए वैध बनाने की कोशिश कर रही है।
अन्य न्यूज़












