Kerala High Court ने BJP पार्षद Sugathan की एहतियाती हिरासत रद्द की, रिहाई का आदेश

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तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भाजपा पार्षद आर. सुगाथन को विय्यूर केंद्रीय जेल से रिहा करने का निर्देश उच्च न्यायालय ने दिया है। अदालत ने जिला कलेक्टर द्वारा जारी निरोध आदेश को विचारहीन और अपठनीय दस्तावेजों पर आधारित माना। इस निर्णय से स्थानीय निकाय में भाजपा के अल्पमत प्रशासन को राहत मिली है।

कोच्चि/तिरुवनंतपुरम, छह अक्टूबर तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बहुत कम बहुमत के सहारे चल रही सत्ताधारी भाजपा के लिए बड़ी राहत की बात है कि केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उसके पार्षद आर. सुगाथन की एहतियाती हिरासत को रद्द कर दिया और उन्हें विय्यूर केंद्रीय जेल से रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस. की पीठ ने सुगाथन की पत्नी अश्वती जी. आर. की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह राहत दी। सुगाथन को कई आपराधिक मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (केएएपीए), 2007 के तहत आठ जून से छह महीने के लिए विय्यूर जेल में एहतियाती हिरासत में रखा गया था।

अदालत ने कहा कि तिरुवनंतपुरम के जिला कलेक्टर द्वारा आठ जून को जारी हिरासत आदेश ‘‘उचित तरीके से विचार किए बिना और आवश्यक संतुष्टि के अभाव में महज औपचारिकता के तौर पर’’ जारी किया गया। पीठ ने कहा कि सरकार द्वारा हिरासत आदेश जारी करने के लिए जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया, उनमें से कुछ की अपठनीय प्रतियां सुगाथन को दी गई थीं। अदालत ने अभियोजन महानिदेशक टी. आसफ अली के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि बंदी को दस्तावेज उपलब्ध कराने के मामले में पर्याप्त अनुपालन हुआ था।

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, मौजूदा मामले में चुनौती दिया गया एहतियाती हिरासत आदेश इस आधार पर भी रद्द किया जाना चाहिए।’’ पीठ ने यह भी कहा कि 10 जून को गिरफ्तारी के बाद पार्षद द्वारा 12 जून को दिए गए अभ्यावेदनों पर भी सरकार ने विचार नहीं किया। अदालत ने कहा, ‘‘...हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि बंदी के खिलाफ जारी एहतियाती हिरासत आदेश, बंदी द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों पर विचार नहीं किए जाने के आधार पर रद्द किए जाने योग्य है।’’ अदालत ने इसके बाद हिरासत आदेश के साथ-साथ उसे मंजूरी देने वाले 21 जून के और उसकी पुष्टि करने वाले छह जुलाई के राज्य सरकार के क्रमिक आदेश भी रद्द कर दिए। अगर सुगाथन एहतियाती हिरासत में बने रहते तो बिना आधिकारिक अनुमति के नगर निगम की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने पर उनकी सदस्यता खत्म हो सकती थी।

इससे स्थानीय निकाय में भाजपा का मामूली बहुमत खतरे में पड़ सकता था। उच्च न्यायालय का यह फैसला सत्तारूढ़ कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए भी झटका है। इसी सरकार ने हिरासत आदेश जारी किया था और उसने निगम में अविश्वास प्रस्ताव लाने की इच्छा भी जताई थी, बशर्ते वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) उसका समर्थन करे।

फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा कि वह इस फैसले से खुश हैं, क्योंकि इससे पार्टी का यह रुख सही साबित हुआ कि पुलिस ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘माकपा ने मामला दर्ज कराया और वी. डी. सतीशन सरकार ने इसे आगे बढ़ाया। हमें कोई संदेह नहीं था कि यह फर्जी और राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला था।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा ने अपने 10 साल के शासन में विपक्ष को निशाना बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया और अब कांग्रेस-नीत मोर्चा भी ऐसा ही कर रहा है।

इस बीच, कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद के. एस. सबरीनाथन ने कहा कि उन्हें सुगाथन को राहत दिए जाने के आधार के बारे में जानकारी नहीं है और इसपर टिप्पणी करने से पहले उन्हें फैसले का अध्ययन करना होगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक लड़ाई है और हम इसे आगे भी जारी रखेंगे।’’ उन्होंने यह भी कहा कि सुगाथन के खिलाफ आपराधिक मामले माकपा के शासन के दौरान दर्ज हुए थे और समय के साथ उनकी संख्या बढ़ती गई। सबरीनाथन ने कहा कि सरकार हिरासत के दौरान सुगाथन को कथित तौर पर नियमों के खिलाफ दी गई अंतरिम छूट के मामले की भी जांच कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘नगर निगम की अक्षमता के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

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