संविधान को जानें: संविधान के किस प्रावधान के तहत होती है राज्यपाल की नियुक्ति?

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 21, 2021   16:59
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संविधान को जानें: संविधान के किस प्रावधान के तहत होती है राज्यपाल की नियुक्ति?

राज्यपालों की नियुक्ति मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि राज्यपाल राज्य के मुख्यमंत्री के सलाह पर ही काम करता है। हालांकि राज्यपालों की भूमिका पर समय-समय पर सवाल उठते रहे है।

भारत एक संघीय ढांचे वाला लोकतांत्रिक देश है जहां राज्यों की खास भूमिका होती है। राज्यों के विकास और तरक्की के लिए वहां एक अपनी सरकार होती है। इसके साथ-साथ जैसे केंद्र में देश का प्रमुख राष्ट्रपति होता है वैसे ही राज्यों का प्रमुख राज्यपाल होता है। राज्यपालों की नियुक्ति मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि राज्यपाल राज्य के मुख्यमंत्री के सलाह पर ही काम करता है। हालांकि राज्यपालों की भूमिका पर समय-समय पर सवाल उठते रहे है। राज्यपालों की भूमिका तब अहम हो जाती है जब किसी राज्य में अल्पमत की सरकार चल रही हो या सरकार बनाने के लिए दांव पेंच का सवाल हो। लेकिन क्या आपको पता है कि राज्यपाल की नियुक्ति संविधान के किस प्रावधान के तहत की जाती है? आखिर राज्यपाल के पास राज्य में कैसी शक्तियां होती हैं?

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भारतीय संविधान का भाग VI राज्यों से संबंधित है जिसे संघीय ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। संविधान के अनुच्छेद 152 से 237 तक में राज्यों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्यपाल की व्यवस्था की गई है। अनुच्छेद 155 के तहत ही राष्ट्रपति द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति की जाती है। राज्यपाल राज्यों में संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। राज्यपाल देश के संघीय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो केंद्र और राज्यों के बीच एक पुल का काम करता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से लेकर 162 तक में राज्यपाल की भूमिका वर्णित की गई है। राज्यों के राज्यपाल कमोबेश राष्ट्रपति की ही तरह होता है। सामान्यत: राज्यपाल राज्यों में राष्ट्रपति जैसे ही भूमिका का निर्वहन करता है। राज्यों में राज्यपाल की भूमिका को चार भागों में बांटा गया है।

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कार्यकारी 

विधायी

वित्तीय 

न्यायिक

कार्यकारी के तहत राज्यपाल के पास बहुमत वाले नेता को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने तथा मंत्रिमंडल को गठित करने में मुख्यमंत्री की सहायता करने का अधिकार होता है।


विधायी

राज्यपाल के पास विधान सभा की बैठक को किसी भी आपात काल में बुलाने का और स्थगित करने का अधिकार होता है। राज्यपाल चाहे तो वह दोनों सदन की संयुक्त बैठक भी बुला सकता है। राज्यपाल के पास राज्य की विधान सभा द्वारा किसी भी विधेयक को रद्द करने और राष्ट्रपति के पास समीक्षा के लिए भेजने का भी अधिकार होता है। गौर करने वाली बात यह भी है कि राज्य का विधानसभा राज्यपाल की अनुमति के बिना कोई भी विधेयक पारित नहीं कर सकता है। 

वित्तीय

राज्यपाल इस बात को भी सुनिश्चित करता है कि राज्य का वार्षिक वित्तीय बजट विधानमंडल के समक्ष रखा जाए। इसके अलावा कोई भी धन विधेयक उसकी अनुमति के बाद ही विधानसभा में प्रस्तुत किया जाए।

 

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न्यायिक

न्यायिक मामलों में भी राज्यपाल के पास खास अधिकार होता है। राज्यपाल उच्च न्यायालय से विचार करने के बाद जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। उनके स्थानांतरण पर और पदोन्नति पर भी फैसला लेता है। वह न्यायिक आयोग से भी जुड़े लोगों के नियुक्ति करता है।

आपको यह जानना भी बहुत जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को विशेष शक्ति मिली हुई है और यह सकती है विवेकाधिकार का। राज्यपाल स्वविवेक संबंधी कार्यों में मंत्री परिषद का सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है। इसके अलावा यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं है तो ऐसे में नए सरकार के लिए निमंत्रण देना राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है। सरकार को बहुमत सिद्ध करने के लिए कितना समय दिया जाना चाहिए, यह भी राज्यपाल अपने विवेक के आधार पर तय कर सकता है। 

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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्यपालों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र को सुचारू रूप से चलाने में राज्यपाल अहम भूमिका निभाते हैं। राज्यपालों की भूमिका पर वर्तमान के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अनुसार राज्यपाल राज्य का संरक्षक और मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है और देश के संघात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।





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मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा, आदिवासी विधायक ने बताया जान का खतरा

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 25, 2021   23:21
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मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा, आदिवासी विधायक ने बताया जान का खतरा

इस पर सदन में कांग्रेस विधायकों ने नागर सिंह चौहान को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर हंगामा कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधायक हो या पूर्व विधायक, सभी नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी सरकार की है। वे सभी की सुरक्षा की गारंटी लेते हैं

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन का कार्यवाही हंगामेदार रही। इस दौरान कांग्रेस से आदिवासी विधायक कलावती भूरिया ने पूर्व विधायक नागर सिंह चौहान पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान का खतरा बताया, तो वहीं चिटफंड कंपनियों के अवैध कारोबार के मामले में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।

 

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मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने के पहले जोबट विधानसक्षा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया ने सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने सदन में कहा कि अलीराजपुर से पूर्व विधायक नागर सिंह चौहान मेरी हत्या करा देंगे। मुझे धमकियां दी जा रही हैं। नाक-कान काटने की धमकी दी गई। इस पर सदन में कांग्रेस विधायकों ने नागर सिंह चौहान को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर हंगामा कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधायक हो या पूर्व विधायक, सभी नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी सरकार की है। वे सभी की सुरक्षा की गारंटी लेते हैं और महिला विधायक की सुरक्षा के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

 

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इसके तत्काल बाद पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि महिला और आदिवासी विधायक की सुरक्षा का सवाल है। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष का मामला नहीं है। एक आदिवासी क्षेत्र की विधायक की सुरक्षा का मामला है। यदि कलावती भूरिया के साथ अनहोनी होती है तो पूरी सदन को शर्मसार होना पड़ेगा, इसलिए मामले को सरकार गंभीरता से लें। वहीं, कांग्रेस विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि एक महिला विधायक को जान से मारने की धमकी मिल रही है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही। उन्होंने पूर्व विधायक नागर सिंह चौहान को गिरफ्तार करने की मांग रखी।

 

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इस पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि गिरफ्तार नहीं कर सकते। यह लोकल राजनीति का मामला है। सदस्य की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया। सदस्यों के हंगामे के बीच गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जिस मामले का जिक्र किया है, उसमें कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ है। पूर्व विधायक ने प्रेस के जरिए कुछ बातें कही थीं और उसका जवाब भी प्रेस के माध्यम से दे दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने मामले को शांत कराते हुए विधायक की सुरक्षा का आश्वासन दिया। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ा दी।

 

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इसके बाद सदन में चिटफंड कंपनियों के अवैध कारोबार का मामला उठा। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मामले को उठाते हुए आरोप लगाया कि ग्वालियर चंबल संभाग में कई फर्जी कंपनियां कारोबार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जीवन सुलभ नाम की फर्जी कंपनी 53 लाख रुपये लेकर फरार हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि यह कंपनियां हर साल पासबुक बदलकर फर्जीवाड़ा कर रही हैं। इसमें को-ऑपरेटिव सोसायटी की सांठगांठ भी सामने आ रही है। ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य स्तरीय कमेटी इसकी जांच करें और मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा जाए। इस पर सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा कि इसे लेकर गाइडलाइन बनाई जा रही है, ताकि ऐसी कंपनियों का रिकॉर्ड पोर्टल में दर्ज किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एंटी माफिया अभियान चल रहा है, जिसमें सरकार चिटफंड कंपनियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर रही है।





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मध्य प्रदेश विधानसभा में उठा ग्वालियर में अवैध रेत खनन का मामला

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 25, 2021   23:02
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मध्य प्रदेश विधानसभा में उठा ग्वालियर में अवैध रेत खनन का मामला

कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर के लोहानी गांव में अवैध खदान का मामला सदन में उठाते हुए कहा कि रेत माफिया द्वारा किये जा रहे अवैध रेत उत्खनन के संबंध में कलेक्टर से उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसका क्या कारण है।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर के लोहानी गांव में अवैध खदान का मामला सदन में उठाया। इस पर विभाग के मंत्री ने दोषियों पर कार्रवाई की बात कही।

 

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मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव ने ग्वालियर के लोहानी गांव में अवैध खदान का मामला सदन में उठाते हुए कहा कि रेत माफिया द्वारा किये जा रहे अवैध रेत उत्खनन के संबंध में कलेक्टर से उन्होंने स्वयं उपस्थित होकर शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसका क्या कारण है। कलेक्टर को 15 बार फोन पर दी बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं की गई।

 

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इसके जवाब में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अभी तक जो कार्रवाई की गई है उसमें 8 प्रकरण दर्ज किए गए हैं और 4 पोकलेन जब्त की गई है। इस पर लाखन सिंह यादव ने कहा कि वसई में स्वीकृत रेत खदान में रेत नहीं है। उसकी आड़ में आसपास के गांव से रेत निकाली जा रही है। इसको लेकर मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।





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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री करेंगे 100 दीनदयाल रसोई केन्द्रों का शुभारंभ, जरूरतमंद लोगों को मिलेगा सस्ता खाना

  •  दिनेश शुक्ल
  •  फरवरी 25, 2021   22:36
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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री करेंगे 100 दीनदयाल रसोई केन्द्रों का शुभारंभ, जरूरतमंद लोगों को मिलेगा सस्ता खाना

मुख्यमंत्री चौहान रसोई योजना की सतत निगरानी के लिए बनाये गये पोर्टल का भी लोकार्पण करेंगे। पोर्टल में प्रतिदिन लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या, रसोई केन्दों का विवरण, ऑनलाइन रसोई केन्द्रों और नगरीय निकायों को दान देने की सुविधा जन-सामान्य के लिये की गई है।

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार, 26 फरवरी को दोपहर 3 बजे राजधानी भोपाल स्थित मिंटो हाल में दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना के द्वितीय चरण में सुदृढ़ीकृत एवं नवीन 100 रसोई केन्द्रों का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान इंदौर, उज्जैन, मुरैना, धार और छतरपुर जिले के रसोई केन्द्रों पर उपस्थित लाभार्थियों से संवाद भी करेंगे। यह जानकारी गुरुवार को जनसंपर्क अधिकारी राजेश पाण्डेय ने दी। 

 

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उन्‍होंने बताया कि यह रसोई केन्द्र 52 जिला मुख्यालय और 6 धार्मिक नगर मैहर, ओंकारेश्वर, महेश्वर, अमरकंटक, ओरछा और चित्रकूट में संचालित होंगे। कार्यक्रम को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह और नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री ओ.पी.एस. भदौरिया भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण क्षेत्रीय टी.व्ही. न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर भी किया जायेगा।

 

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मुख्यमंत्री चौहान रसोई योजना की सतत निगरानी के लिए बनाये गये पोर्टल का भी लोकार्पण करेंगे। पोर्टल में प्रतिदिन लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या, रसोई केन्दों का विवरण, ऑनलाइन रसोई केन्द्रों और नगरीय निकायों को दान देने की सुविधा जन-सामान्य के लिये की गई है। इस पोर्टल में एक डैशबोर्ड भी है, जिससे योजना क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ विभिन्न केन्दों में योजना के क्रियान्वयन की बेहतर समीक्षा हो सकेगी। योजना के सभी 99 रसोई केन्द्रों को google map पर भी टैग किया गया है। इससे रसोई केन्द्रों को आम नागरिक आसानी से ढूँढ सकेंगे।

 

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प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा है कि योजना का मुख्य उददेश्य ''किसी जरूरत मंद की थाली-नहीं रहेगी खाली'' है। रसोई केन्द्र में सोमवार से शनिवार तक 10 रूपये प्रति थाली भोजन दिया जायगा। भोजन वितरण सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक किया जायेगा। रसोई केन्द्र की स्थापना बस स्टेण्ड़, रेलवे स्टेशन, जिला अस्पताल के पास की गयी है। योजना से शहर के गरीब लोगों के साथ ही गाँवों से मजदूरी के लिए शहर आने वाले लोग भी लाभान्वित होंगे। दीनदयाल रसोई थाली में रोटी, मौसमी सब्जी, दाल एवं चावल दिया जायेगा।

 

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नवीन योजना में रसोई केन्द्रों की स्थापना के लिए 13 करोड़ 36 लाख रूपये एक-मुश्त सहायता और 15 करोड़ 84 लाख रूपये का आवर्ती व्यय का बजट स्वीकृत किया गया है। पहली बार राज्य शासन द्वारा 5 रूपये प्रति व्यक्ति के मान से अनुदान स्वीकृत किया गया है। दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना के रूप में संस्थागत व्यवस्था के उपलब्ध होने से कोविड काल में गरीब शहरी नागरिकों, अप्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। महामारी के दौरान ये रसोई केन्द्र अत्यंत सार्थक सिद्ध हुए। प्रथम चरण के आरम्भ से अब-तक एक करोड़ 42 लाख थाली भोजन कराया जा चुका है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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