Lal Krishna Advani ने Rath Yatra से Bharat Ratna तक तय किया BJP का ऐतिहासिक सफर

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी 8 नवंबर को अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। कराची में जन्मे आडवाणी ने आरएसएस और भारतीय जनसंघ से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के लिए ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली और साल 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
आज यानी की 08 नवंबर को लाल कृष्ण आडवाणी अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प शख्सियत में से एक हैं। आजादी के बाद विपक्ष की राजनीति कर रहे आडवाणी का जीवन कम दिलचस्प नहीं है। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में से एक हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर लाल कृष्ण आडवाणी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
पाकिस्तान के कराची में 08 नवंबर 1927 को लालकृष्ण आडवाणी का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम किशनचंद डी आडवाणी था और माता का नाम ज्ञानी देवी था। उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, डीजी नेशनल कॉलेज और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से विधि की डिग्री हासिल की थी। हालांकि देश के विभाजन के बाद साल 1947 में उनको सिंध छोड़कर भारत आना पड़ा था।
सामाजिक और राजनीतिक जीवन
साल 1947 से लाल कृष्ण आडवाणी के सामाजिक जीवन की शुरूआत हुई थी। वह छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। साल 1947 में उन्होंने राजस्थान में RSS की गतिविधियों की कमान संभाली थी। फिर साल 1951 में जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरएसएस की राजनीतिक शाखा भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, तो आडवाणी राजस्थान में पार्टी की इकाई के सचिव बने। साल 1970 तक उस पद पर रहे और फिर दिल्ली आ गए।
साल 1970 में वह भारत की संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के सदस्य बने। साल 1989 तक वह इस सीट पर रहे। फिर साल 1973 में वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने और साल 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान उन्होंने जेल यात्रा भी गई। साल 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद से साल 1986 तक वह पार्टी के महासचिव रहे। फिर साल 1986 से लेकर 1991 तक वह पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व संभालते रहे। बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में साल 1998 और 1999 दो बार केंद्रीय गृहमंत्री बने।
भाजपा के शिल्पकार
फिर साल 2002 में वह उप प्रधानमंत्री बने और साल 2004 में आम चुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद आडवाणी लोकसभा में विपक्ष के नेता बने। वह लंबे समय तक भाजपा के अध्यक्ष रहे और करीब 3 दशकों तक संसदीय करियर देखा। उनके नाम भाजपा को खड़ा करने और इसको राष्ट्रीय स्तर तक लाने का श्रेय जाता है। वह कभी पार्टी के कर्णधार कहलाए और कभी लौह पुरुष।
राम मंदिर आंदोलन
आडवाणी ने राम मंदिर के लिए बड़ा आंदोलन किया था। साल 1990 में उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा निकाली गई थी। जिसमें आडवाणी को गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन इस गिरफ्तारी से उनका राजनीतिक कद और भी बड़ा हो गया और लोकप्रियता भी चरम पर पहुंच गई।
इसके बाद साल 2009 के लोकसभा चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी रहे थे। साल 2014 से लेकर 2020 तक वह भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य बने। फिर साल 2024 में उनको भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
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