भारत के सीमेंट ब्रांडों पर आधारित पुस्तक 'ABC of Cement Brands in India: Past, Present and Future' का लोकार्पण

Book Launch
PR

लेखक डॉ. के.एन. झा ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें वर्ष 1914 से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय सीमेंट उद्योग की विकास यात्रा का विस्तृत विवरण दिया गया है। पुस्तक में उन 80 से अधिक सीमेंट ब्रांडों का भी विश्लेषण किया गया है जो समय के साथ बाजार से विलुप्त हो गए।

नोएडा। भारतीय सीमेंट उद्योग के वरिष्ठ विशेषज्ञ एवं लेखक डॉ. के.एन. झा द्वारा लिखित पुस्तक "ABC of Cement Brands in India: Past, Present & Future" का भव्य लोकार्पण आज नोएडा में आयोजित एक समारोह में किया गया।

पुस्तक का लोकार्पण मंजू देवी कनोडिया, विशाल कनोडिया एवं गौतम कनोडिया (संस्थापक, कनोडिया समूह) द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय सीमेंट उद्योग के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन निर्माण सामग्री परिषद (NCB), डॉ. के. मोहन तथा प्रसिद्ध टेक्नो-लीगल सलाहकार एवं कॉर्पोरेट एडवाइजर विजय सरदाना विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. के. मोहन ने कहा कि भारत का सीमेंट उद्योग देश के आर्थिक एवं आधारभूत संरचना विकास के साथ निरंतर विकसित हुआ है और आज यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक उद्योग बन चुका है। तकनीक, गुणवत्ता, स्थिरता (Sustainability) और ब्रांड निर्माण के क्षेत्र में हुए परिवर्तन इस उद्योग की सफलता की कहानी बताते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. झा की यह पुस्तक सीमेंट उद्योग के विकास को ब्रांडों के दृष्टिकोण से समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री विजय सरदाना ने कहा कि यह पुस्तक सीमेंट उद्योग से जुड़े पेशेवरों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, सलाहकारों एवं विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी। पुस्तक में यह बताया गया है कि किस प्रकार ब्रांड बनाए जाते हैं, विकसित होते हैं, समय के साथ स्वयं को पुनर्स्थापित करते हैं तथा कुछ ब्रांड प्रतिस्पर्धा में पीछे भी रह जाते हैं।

लेखक डॉ. के.एन. झा ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें वर्ष 1914 से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय सीमेंट उद्योग की विकास यात्रा का विस्तृत विवरण दिया गया है। पुस्तक में उन 80 से अधिक सीमेंट ब्रांडों का भी विश्लेषण किया गया है जो समय के साथ बाजार से विलुप्त हो गए। साथ ही उन अग्रणी उद्योगपतियों और प्रमोटरों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है जिन्होंने अपने ब्रांडों को चार दशकों से अधिक समय तक सफलतापूर्वक स्थापित एवं प्रासंगिक बनाए रखा।

उन्होंने बताया कि पुस्तक में बहुराष्ट्रीय, सार्वजनिक क्षेत्र तथा उभरते हुए निजी सीमेंट ब्रांडों की यात्रा और चुनौतियों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। अंतिम अध्याय में भारतीय सीमेंट उद्योग के भविष्य, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी एवं सतत विकास (Sustainable Development) की संभावनाओं पर विशेष चर्चा की गई है।

इस अवसर पर सीमेंट उद्योग के अनेक वरिष्ठ पेशेवर एवं अधिकारी, जिनमें बाबूलाल सिंह, आशुतोष शुक्ला एवं आर.एन. मालू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

लेखक के बारे में

डॉ. के.एन. झा सीमेंट उद्योग के एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं और उन्हें इस क्षेत्र में 34 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने ब्रांडिंग, ग्रामीण विपणन एवं सीमेंट उद्योग से संबंधित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़