साहित्य प्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद का 141 वां जन्म दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया

साहित्य प्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद का 141 वां जन्म दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया

साहित्य प्रेमियों ने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद का 141 वां जन्मदिवस बच्चों के साथ केक काटकर बड़ी धूमधाम से मनाया। लेकिन कार्यक्रम में जिला प्रशासन की भी मौजूदगी नहीं देखी गई एवं जिला नेताओं ने भी लमही से दूरी बना रखी है। जन्म दिवस के कार्यक्रम में किसी भी प्रशासन अधिकारी एवं जिला नेता के ना होने पर साहित्य प्रेमियों में निराशा देखी गई।

हिंदी साहित्य के प्रख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद की जयंती बड़े धूमधाम से साहित्य प्रेमियों ने बनाया मुंशी प्रेमचंद दो भाषाओं को जोड़कर रखने वाले साहित्यकार रहें हैं। प्रेमचंद साहित्य विधाओं में आधुनिकता और यथार्थ वाद का प्रवर्तन किया। मुंशी जी के साहित्य में भारतीय जीवन की नियति को निर्धारित करने वाले किसान वर्ग के सबसे बड़े पक्षकार प्रेमचंद एक ऐसा आईना हैं, जिसमें न सिर्फ हमारे समाज का अतीत और वर्तमान दिखता है। बल्कि भविष्य के संकेत भी छिपे हैं। मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी से 4 मील दूर लमही गांव में हुआ था। 

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मुंशी जी का जन्म दिवस लम्हे स्थित उनके आवास पर साहित्य प्रेमियों ने बड़े धूमधाम से मनाया लेकिन कार्यक्रम में जिला प्रशासन की भी मौजूदगी नहीं देखी एवं जिला नेताओं ने भी लमही से दूरी बना रखी है साहित्यकार का 141 वां जन्मदिवस बच्चों के साथ केक काटकर बड़ी धूमधाम से मनाया गया। जन्म दिवस के कार्यक्रम में किसी भी प्रशासन अधिकारी एवं जिला नेता के ना होने पर साहित्य प्रेमियों में निराशा देखी गई। हिंदी साहित्य में प्रेमचंद्र जी ऐसे साहित्यकार रहे हैं। 

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जिन्होंने साहित्य में रहस्य रोमांच और तिलिस्म को जगह नहीं दी बल्कि उन्होंने साहित्य में धनिया होरी सूरदास झुनिया जैसे पात्रों को साहित्य में जगह दी मौजूदा समय में राष्ट्रवाद की खूब चर्चा होती है मुंशी जी राष्ट्रवाद कोढ़ मानते थे। मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन के उपलक्ष में हर साल लम्हे महोत्सव मनाया जाता है लमही महोत्सव 2021 की जिम्मेदारी इस बार पुरातत्व विभाग को दी गई है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी सुभाष यादव ने बताया कि लमही महोत्सव के सारे कार्यक्रम को फेसबुक पर लाइव चलाया जाएगा, महोत्सव के कार्यक्रमों को कई चरणों में बांटा गया है।





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