बिहार में संकट की ओर बढ़ रहा है महागठबंधन, कांग्रेस अनुचित व्यवहार से खुश नहीं

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 28, 2019   18:39
बिहार में संकट की ओर बढ़ रहा है महागठबंधन, कांग्रेस अनुचित व्यवहार से खुश नहीं

लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे आजाद का नयी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में काफी जोरशोर के साथ स्वागत किया था।

पटना। बिहार में महागठबंधन गुरुवार को संकट की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है और कांग्रेस के कई नेता यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी को सीटों के बंटवारे में ‘‘उचित हिस्सेदारी” नहीं मिली और आला कमान से मांग की कि वह हस्तक्षेप करे इससे पहले की बहुत देर हो जाए। हाल में कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व टेस्ट क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व से अनुरोध करेंगे कि वह “निर्णायक” कदम उठाए। दरभंगा के मौजूदा सांसद ने कहा, “अगर किसी कोअपनी मौजूदा सीट से ही लड़ने का मौका नहीं मिले तो यह भावी उम्मीदवारों के लिये ही नहीं बल्कि पूरी पार्टी के लिये बेहद हताशापूर्ण है। मैं कांग्रेस के सर्वोच्च नेतृत्व से अनुरोध करूंगा कि वह स्पष्ट रूप से विचार करे और कुछ निर्णायक कदम उठाए।” क्रिकेटर से राजनेता बने आजाद महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दबाव से खुश नहीं हैं जो दरभंगा सीट से चुनाव लड़ने पर ही जोर दे रहा है। 

लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे आजाद का नयी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में काफी जोरशोर के साथ स्वागत किया था। दोनों की परंपरागत ‘मिथिला पाग’ लगाए तस्वीरें उनके कांग्रेस में शामिल होने के अगले दिन प्रमुख अखबारों में छपीं थी और ऐसा संकेत दिया गया था कि ‘महागठबंधन’ की तरफ से दरभंगा से आजाद की उम्मीदवारी तय है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद मैथिल ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। दरभंगा सीट पर 2014 में मामूली अंतर से हारी राजद इस बार यहां से अपने वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी की उम्मीदवारी के लिये दबाव बना रही है। इस सीट पर मुसलमानों का अच्छा-खासा प्रभाव है। महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर बनी सहमति के मुताबिक राजद 20 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी, कांग्रेस नौ, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) तीन, रालोसपा पांच सीटों पर, विकासशील इंसान पार्टी तीन और भाकपा एक सीट पर उम्मीदवार खड़ा करेगी। 

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आजाद के नजरिये का समर्थन करते हुए सुपौल से सांसद रंजीत रंजन ने कहा, “एक सख्त संदेश भेजा जाना चाहिए कि हमें कोई हल्के में न ले। मैं आलाकमान से अनुरोध करुंगी कि वह फैसला ले जिससे कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिरने से रोका जा सके।” रंजन सुपौल जिला राजद प्रमुख और विधायक यदुवंश कुमार यादव के उस बयान से भी बुधवार को नाराज दिखीं कि वह मौजूदा कांग्रेस सांसद के सामने उम्मीदवार उतारेंगे बिना “पार्टी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई” की चिंता किये। रंजीत रंजन पप्पू यादव की पत्नी हैं। पप्पू यादव ने 2014 में मधेपुरा सीट राजद उम्मीदवार के तौर पर जीती थी लेकिन एक साल बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। उन्होंने बाद में जन अधिकार पार्टी (जेएपी) के नाम से अपना संगठन बना लिया था और काफी समय से महागठबंधन में शामिल होने के प्रयास के तहत कांग्रेस और लालू प्रसाद के राजद की तारीफ कर रहे थे। राजद ने हालांकि घोषणा की है कि वह वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव को मधेपुरा से खड़ा कर रहा है। वह पांच साल पहले पप्पू यादव से हार गए थे जब शरद ने जद(यू) उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष काकुब कादरी ने कहा कि पार्टी के साथ राज्य में अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। 





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