Prabhasakshi NewsRoom: उद्धव सरकार गिरने के आसार बढ़े, सबसे बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है शिवसेना

Uddhav Thackeray
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शरद पवार के साथ चर्चा के लिए कांग्रेस के पर्यवेक्षक कमलनाथ भी मुंबई पहुँच गये हैं लेकिन इस समय जो हालात नजर आ रहे हैं वह यही दर्शा रहे हैं कि एकनाथ शिंदे की शर्त नहीं माने जाने पर राज्य सरकार का गिरना तय है।

महाराष्ट्र में सियासी संकट गहरा गया है क्योंकि सत्तारुढ़ गठबंधन का नेतृत्व कर रही शिवसेना अब तक के सबसे बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है। विधानसभा में शिवसेना के 56 विधायक हैं लेकिन इसमें से आधे से ज्यादा विधायक बागी नेता एकनाथ शिंदे के साथ आ गये हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपनी सरकार बचाने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं तो दूसरी ओर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भी मुंबई पहुँच गये हैं और पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। शरद पवार के साथ चर्चा के लिए कांग्रेस के पर्यवेक्षक कमलनाथ भी मुंबई पहुँच गये हैं लेकिन इस समय जो हालात नजर आ रहे हैं वह यही दर्शा रहे हैं कि एकनाथ शिंदे की शर्त नहीं माने जाने पर राज्य सरकार का गिरना तय है। हम आपको बता दें कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कह चुके हैं कि एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ कर भाजपा के साथ गठबंधन किया जाये लेकिन मुख्यमंत्री यह शर्त मानने से इंकार कर चुके हैं।

इस बीच, शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र के बागी विधायकों का एक समूह बुधवार सुबह गुवाहाटी पहुंचा। यहां उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच शहर के बाहरी इलाके में एक लग्ज़री होटल में ले जाया गया है। हवाई अड्डे पर भाजपा सांसद पल्लब लोचन दास और सुशांत बोरगोहेन ने इन बागी विधायकों का स्वागत किया। एकनाथ शिंदे ने पहले हवाई अड्डे के बाहर इंतजार कर रहे पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि उनके पास ‘‘40 विधायकों का समर्थन’’ है। एकनाथ शिंदे ने पत्रकारों से कहा, ''यहां 40 विधायक मेरे साथ हैं। इनके अलावा 10 और विधायक जल्द मेरे साथ आएंगे।'' उन्होंने कहा कि मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता। हम उस शिवसेना को बनाए रहने के इच्छुक हैं जिसे दिवंगत बाला साहेब ठाकरे ने बनाया था।

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इस बीच, सूत्रों ने बताया कि फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि शिवसेना के कितने विधायक इस विमान से यहां पहुंचे हैं, लेकिन विमान में 89 लोग सवार थे, जिनमें चालक दल के सदस्य भी शामिल हैं। ये विधायक सूरत से गुवाहाटी पहुंचे हैं और उन्हें असम राज्य परिवहन निगम की तीन बसों में होटल ले जाया गया है। ऐसी अटकले हैं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इन बागी विधायकों से दिन में मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, भाजपा या मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस बैठक की अभी तक पुष्टि नहीं की है। होटल और उसके आसपास भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विधायकों को मंगलवार को मुंबई से सूरत लाया गया और सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें गुवाहाटी ले जाने का फैसला किया गया। ऐसा शायद पहली बार है कि पश्चिमी भारतीय राज्य के विधायकों को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह के बाद किसी पूर्वोत्तर राज्य लाया गया है।

शिवसेना मंत्री और विधायक भाजपा के साथ जाने को आतुर

इस बीच, शिवसेना के एक बागी मंत्री ने कहा है कि उन्हें पार्टी नेतृत्व से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वह एनसीपी और कांग्रेस के काम करने के तरीकों से खुश नहीं हैं। बागी विधायकों में से एक महाराष्ट्र के मंत्री संदीपन भूमरे ने एक टीवी चैनल से फोन पर बातचीत में कहा, ''हमें शिवसेना के नेतृत्व से कोई शिकायत नहीं है। हमने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समक्ष हमारी शिकायतें रखी थीं कि एनसीपी और कांग्रेस के मंत्रियों के साथ काम करना मुश्किल होता जा रहा है। हमारे लिए उनके मंत्रियों से प्रस्तावों और काम संबंधी मंजूरी लेना बहुत मुश्किल हो गया है।’’ संदीपन भूमरे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें जो विभाग दिया गया है, उससे वह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, ''मुझे जीवन में और क्या चाहिए, लेकिन एक जन प्रतिनिधि के रूप में, मुझे अपने लोगों की शिकायतों को दूर करना होगा। इन दो गठबंधन सहयोगियों के कारण मैं ऐसा नहीं कर पा रहा हूं।’’ इस बीच, शिवसेना के एक अन्य बागी विधायक संजय शिरष्ठ ने एक टीवी चैनल को बताया कि पार्टी के 35 विधायक गुवाहाटी में हैं। उन्होंने कहा, ''आज शाम तक कुछ और विधायक हमारे साथ आएंगे। हमें तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है।’’ संजय शिरष्ठ ने राज्य के एनसीपी और कांग्रेस के मंत्रियों पर भी निशाना साधा और दावा किया कि उनके ‘‘शत्रुतापूर्ण व्यवहार’’ ने शिवसेना विधायकों को विद्रोह करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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उधर, शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने भी कहा है कि पार्टी को भाजपा के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने चाहिए। हम आपको बता दें कि ठाणे के ओवाला-माजीवाड़ा क्षेत्र से विधायक प्रताप सरनाइक के खिलाफ धनशोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच चल रही है। प्रताप सरनाइक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने पहले भी यह विचार रखा था कि शिवसेना को भाजपा के साथ जाना चाहिए।’’

दूसरी ओर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के बगावती तेवरों के चलते महाराष्ट्र में सत्तारुढ़ महा विकास अघाडी सरकार पर आए संकट के बीच, राज्य भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाने की संभावना तलाश रही है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार में मंत्री रहे नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘सत्ता का आसानी से हस्तांतरण हमारी प्राथमिकता है।’’ भाजपा के सूत्रों ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस समेत पार्टी के कई नेताओं ने सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या हासिल करने के वास्ते मंगलवार को संवैधानिक प्रावधानों पर लंबे समय तक चर्चा की।

कौन हैं एकनाथ शिंदे

आइये अब जरा एक नजर डालते हैं एकनाथ शिंदे पर जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में उथलपुथल मचा दी है। शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने कभी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और वह अपने संगठनात्मक कौशल तथा जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में ऑटो चालक के रूप में काम करने वाले 58 वर्षीय एकनाथ शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में ठाणे-पालघर क्षेत्र में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनायी। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

चार बार के विधायक रहे शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे वर्तमान में महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभाग के मंत्री का प्रभार संभाल रहे हैं। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का आभार कई बार जताते रहे हैं। नौ फरवरी 1964 को जन्मे एकनाथ शिंदे ने स्नातक की शिक्षा पूरी होने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी और राज्य में उभर रही शिवसेना में शामिल हो गए। मूलरूप से पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा जिले से ताल्लुक रखने वाले शिंदे ने ठाणे जिले को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। पार्टी की हिंदुत्ववादी विचारधारा और बाल ठाकरे के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर शिंदे ने शिवसेना का दामन थाम लिया। ठाणे शहर की कोपरी-पचपखाड़ी सीट से विधायक एकनाथ शिंदे सड़कों पर उतरकर राजनीति करने के लिए पहचाने जाते हैं और उन पर हथियारों के साथ जानबूझकर चोट पहुंचाने और दंगा करने समेत विभिन्न आरोपों में दर्जनों मामले दर्ज हैं।

एकनाथ शिंदे 1997 में ठाणे नगर निगम में पार्षद चुने गए थे और इसके बाद वह 2004 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने थे। एकनाथ शिंदे के कद का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि उन्हें पार्टी में दूसरे सबसे प्रमुख नेता के रूप में देखा जाता है। एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे कल्याण सीट से लोकसभा सदस्य हैं। हम आपको बता दें एकनाथ शिंदे को 2014 में संक्षिप्त अवधि के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी नियुक्त किया गया था। अब माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे भाजपा के साथ गठबंधन कर उपमुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। देखना होगा कि उनकी नयी चाहत पूरी होती है या नहीं।

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