Mahua Moitra का TMC बागियों को कड़ा संदेश: इस्तीफा दो और BJP के टिकट पर चुनाव लड़ो

Mahua Moitra
ANI
अंकित सिंह । Jun 12 2026 3:40PM

तृणमूल कांग्रेस में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून और संविधान के 91वें संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि बागी सांसद अलग गुट नहीं बना सकते, बल्कि उन्हें इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना होगा। मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का भी ज़िक्र कर बागी गुट के दावों को खारिज किया।

शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस पर कंट्रोल की लड़ाई और तेज़ हो गई। पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला किया, जबकि बागी सांसदों ने खुले तौर पर BJP के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के साथ नज़दीकी रिश्ते बनाने का समर्थन किया और संसद में अपनी अलग पहचान बनाने की योजना पर आगे बढ़े। यह टकराव तृणमूल कांग्रेस के अंदर बढ़ते संकट के बीच हो रहा है, जो हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पैदा हुआ है। बागी सांसदों के एक गुट ने लोकसभा में बैठने के लिए अलग व्यवस्था की मांग की है, वहीं पार्टी से अलग हुए वरिष्ठ नेताओं ने नेतृत्व के कामकाज और भविष्य की दिशा पर खुलेआम सवाल उठाए हैं।

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X पर एक पोस्ट में मोइत्रा ने तर्क दिया कि बागी नेता संवैधानिक प्रावधानों को गलत समझ रहे हैं और वे एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने लिखा कि TMC के गद्दार सांसदों को कानून की जानकारी नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन (2003) में अलग गुट बनाने का प्रावधान खत्म कर दिया गया था। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती। मूल राजनीतिक पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों को किसी दूसरी पार्टी में विलय करना होता है। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर BJP के टिकट पर चुनाव लड़ना होगा।

कृष्णानगर की सांसद ने अपनी एक पुरानी पोस्ट का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बागी सांसद TMC के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन हासिल भी कर लेते हैं, तो भी वे अपने-आप एक स्वतंत्र संसदीय समूह के तौर पर काम करने के हकदार नहीं हो जाएंगे। मोइत्रा के अनुसार, ऐसा कोई भी कदम उठाने पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत विलय से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना होगा। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र के राज्यपाल के प्रधान सचिव मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फ़ैसले का भी हवाला दिया।

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पार्टी लीडरशिप ने बागी गुट की बात को खारिज कर दिया है, लेकिन बागी गुट के सदस्य अभी भी पूरे भरोसे के साथ अपनी बात कह रहे हैं। ANI से बात करते हुए, बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया कि संसद में अलग बैठने की गुट की मांग का करीब 20 सांसद समर्थन कर रहे हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि हमें 20 सांसदों का समर्थन हासिल है। इस आरोप को खारिज करते हुए कि बागी नेता राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि यह गुट "TMC को बचाना" और उसे नए रूप में फिर से खड़ा करना चाहता है।

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