TMC MP Abhishek Banerjee को बड़ी राहत, Calcutta High Court का आदेश- 6 अगस्त तक No Coercive Action

Court
ANI
अभिनय आकाश । Jul 30 2026 4:07PM

राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और याचिकाकर्ता को पूरी सुरक्षा (ब्लैंकेट प्रोटेक्शन) नहीं दी जा सकती।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन FIR के मामले में 6 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करें। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने की। बेंच ने भवानीपुर पुलिस स्टेशन (केस नंबर 121), कालीतला पुलिस स्टेशन (केस नंबर 140) और बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन (केस नंबर 668) में दर्ज FIR के संबंध में अंतरिम निर्देश जारी किया। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अब तक दर्ज सभी FIR की जानकारी वाली एक लिस्ट उपलब्ध कराएं।

इसे भी पढ़ें: Kakinada Land Grab Case: 15 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश पर High Court सख्त, ACB जांच के आदेश

सुनवाई के दौरान, राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और याचिकाकर्ता को पूरी सुरक्षा (ब्लैंकेट प्रोटेक्शन) नहीं दी जा सकती। राजू ने कहा कि इस तरह की पूरी सुरक्षा नहीं दी जा सकती। आपको कई FIR के लिए अलग-अलग याचिकाएँ दायर करनी होंगी। अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश वकील शंकर नारायण ने तर्क दिया कि उनके क्लाइंट के खिलाफ कई शिकायतें और FIR दर्ज की गई थीं, जिनमें से कुछ चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद दर्ज की गईं। उन्होंने बताया कि कई शिकायतें उन लोगों ने दर्ज कराई थीं जिन्होंने पहले अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और आरोप लगाया कि कुछ मामले कई साल पहले हुई घटनाओं से जुड़े थे।

इसे भी पढ़ें: Kakinada Land Grab Case: 15 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश पर High Court सख्त, ACB जांच के आदेश

वकील ने 'सेबाश्रॉय' (Sebashroy) के नाम पर फंड के कथित गबन से जुड़े एक मामले का भी ज़िक्र किया और कहा कि यह प्रोजेक्ट अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर में बुजुर्गों के लिए अपनी निजी हैसियत से शुरू किया था और इसमें सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ था। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कुछ शिकायतें दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए। एक शिकायत का ज़िक्र करते हुए, जस्टिस भट्टाचार्य ने पूछा कि कथित घटना और शिकायत के बीच 25 दिनों का अंतर क्यों था।

इसे भी पढ़ें: Bribery Case: CBI Court ने Subhash Chand की Bail याचिका खारिज की, कहा Charge Sheet आधार नहीं

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि शिकायत करने वालों में से एक ने कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ा था और दोनों बार हार गए थे।

हालांकि, राज्य ने सुरक्षा की याचिका का विरोध किया। SV राजू ने तर्क दिया कि जिन मामलों में केवल शिकायतें दर्ज की गई हैं और कोई FIR दर्ज नहीं की गई है, उनमें कानून के तहत कार्यवाही रद्द करने की मांग नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता किसी FIR से राहत चाहता है, तो सही तरीका धारा 438 के तहत कोर्ट का दरवाजा खटखटाना है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़