माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय और यूनिसेफ मिलकर देंगे पाँच युवा पत्रकारों को फेलोशिप

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 30, 2019   13:28
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माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय और यूनिसेफ मिलकर देंगे पाँच युवा पत्रकारों को फेलोशिप

विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने बाल अधिकारों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में भागीदारी का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न पक्षों को मीडिया के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल करेगा।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं यूनिसेफ बाल अधिकारों पर साथ मिलकर काम करेंगे। इस आशय का सहमति पत्र आज विश्वविद्यालय में हस्ताक्षरित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी की उपस्थिति में यूनिसेफ की ओर से मध्यप्रदेश प्रमुख माइकल जूमा एवं विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव दीपेन्द्र सिंह बघेल ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये।

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विश्वविद्यालय के कुलपति दीपक तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने बाल अधिकारों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में भागीदारी का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न पक्षों को मीडिया के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल करेगा। बाल अधिकारों पर केन्द्रित कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए बाल अधिकारों पर केन्द्रित कुछ फैलोशिप भी विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जायेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करना है और उन्हें बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना है।

यूनीसेफ के मध्यप्रदेश प्रमुख  माइकल जूमा ने बताया कि विश्व बाल अधिकार समझौते के हस्ताक्षर की 30 वीं वर्षगांठ मना रहा है। आज भी बाल अधिकारों पर सक्रियता से काम करने की आवश्यकता है। इसी को देखते हुए यूनीसेफ ने विश्वविद्यालय के साथ बाल अधिकारों के क्षेत्र में मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर यूनीसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव प्रो. श्रीकांत सिंह, डीन अकादमिक प्रो. पवित्र श्रीवास्तव एवं निदेशक प्रशिक्षण डा. अनुराग सीठा उपस्थित थे।





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पश्चिम बंगाल में बनाई जा रही है भगवान बुद्ध की 100 फुट ऊंची प्रतिमा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   16:18
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पश्चिम बंगाल में बनाई जा रही है भगवान बुद्ध की 100 फुट ऊंची प्रतिमा

बोध गया के एक मंदिर में अगले वर्ष प्रतिष्ठापित करने के वास्ते भगवान बुद्ध की 100 फुट ऊंची एक प्रतिमा यहां बनाई जा रही है। प्रतिमा को बनाने वाले का दावा है कि देश में यह विशालतम प्रतिमा है।

कोलकाता। बोध गया के एक मंदिर में अगले वर्ष प्रतिष्ठापित करने के वास्ते भगवान बुद्ध की 100 फुट ऊंची एक प्रतिमा यहां बनाई जा रही है। प्रतिमा को बनाने वाले का दावा है कि देश में यह विशालतम प्रतिमा है। मूर्तिकार मिंटू पाल द्वारा भगवान बुद्ध की फाइबर ग्लास प्रतिमा बारानगर में घोषपारा क्षेत्र के एक मैदान में बनाई जा रही है।

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पाल ने बृहस्पतिवार को बताया कि अगले साल (2022), बुद्ध पूर्णिमा तक बोधगया में मंदिर में विशालकाय प्रतिमा स्थापित करने की पहल बुद्ध अंतरराष्ट्रीय कल्याण मिशन ने की है। संगठन के एक प्रवक्ता ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार यह देश मेंबुद्ध की सबसे बड़ी प्रतिमा होगी। पाल ने कहा, ‘‘कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। लेकिन प्रतिमा के विभिन्न भागों को अंतिम रूप देने में महीनों लग जाएंगे, जिसे बाद में मंदिर में ले जाया जाएगा।





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कौन है लाल किले वाली घटना में मौजूद विक्की थाॅमस, सोनिया से लेकर प्रियंका के साथ शेयर की हैं तस्वीरें

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 28, 2021   15:58
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कौन है लाल किले वाली घटना में मौजूद विक्की थाॅमस, सोनिया से लेकर प्रियंका के साथ शेयर की हैं तस्वीरें

लाल किले में निशान साहिब वाला झंडा फहराए जाने को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। लाल किले पर झंडा फहराए जाने वाली घटना के वक्त उस भीड़ में एक कैथोलिक भी मौजूद था।

पिछले वर्ष जनवरी के महीने में दिल्ली दंगों से दो-चार हुआ था। उस वक्त सीएए और एनआरसी के नाम पर अराजकता का तांडव देखने को मिला। दंगे के बाद कपिल मिश्रा को बलि का बकरा बनाने की कोशिश हुई थी और उन पर भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे। लेकिन एक साल बाद दिल्ली एक बार फिर जली। आलम तो यह हुआ कि हुड़दंगियों ने लाल किले पर चढ़कर निशान साहेब का झंडा फहरा दिया और जमकर तोड़फोड़ भी मचाई। जिसके बाद उनमें से ही एक व्यक्ति को त्याग करके उसे बीजेपी का आदमी बताया जाने लगा और पीएम मोदी समेत बीजेपी के अन्य नेताओं के साथ उसकी तस्वीरों की सोशल मीडिया पर बाढ़ सी आ गई। जिस व्यक्ति को कल तक अंग्रेजी बोलने वाले किसान के रूप में प्रेजेंट कर बचाव किया जा रहा था। वो पलभर में बीजेपी का करीबी बता दिया गया। लेकिन अब लाल किले में निशान साहिब वाला झंडा फहराए जाने को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। लाल किले पर झंडा फहराए जाने वाली घटना के वक्त उस भीड़ में एक कैथोलिक भी मौजूद था।

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विक्की थाॅमस नाम के इस शख्स ने ब्रिटेन स्थित अकाल चैनल द्वारा उनके फेसबुक पेज पर साझा किए वीडियो में खुद को कैथोलिक के रूप में स्वीकारा है। इसके अलावा अपने फेसबुक बायो में भी अपने धार्मिक दृष्टिकोण के इल्लेख में कैथोलिक के रूप में खुद को दर्शाया है। उसने मार्च 2016 के दौरान अपने फेसबुक अकाउंट पर सोनिया गांधी, (उनके निवास पर), राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अपनी तस्वीरें अपलोड की हैं। 





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शिवसेना ने ट्रैक्टर परेड में हिंसा पर कहा, केंद्र चाहता था कि किसान आक्रोशित हों

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   15:58
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शिवसेना ने ट्रैक्टर परेड में हिंसा पर कहा, केंद्र चाहता था कि किसान आक्रोशित हों

प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डालकर कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कोई मतभेद नहीं था और ना ही उन्होंने अपना धैर्य खोया।

मुम्बई। शिवसेना ने बृहस्पतिवार को भाजपा नीत केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह चाहती थी कि किसान आक्रोशित होकर हिंसक हो जाएं, जिससे तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी उनका प्रदर्शन बदनाम हो। शिवसेना ने यह टिप्पणी गणतंत्र दिवस पर किसानों की ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हुई हिंसा पर की। साथ ही पार्टी ने कहा कि हिंसा राष्ट्रीय हित में नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र भाजपा ने हालांकि शिवसेना के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘‘निराधार’’ बताया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, ‘‘ तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 60 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डालकर कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कोई मतभेद नहीं था और ना ही उन्होंने अपना धैर्य खोया।’’

शिवसेना ने आरोप लगाया, ‘‘ केन्द्र सरकार कुछ कर नहीं कर पा रही थी। वह चाहती थी कि किसान आक्रोशित होकर हिंसक हो जाएं, ताकि उनका प्रदर्शन बदनाम हो। 26 जनवरी को उसकी यह इच्छा पूरी हो गई, लेकिन इससे देश की भी बदनामी हुई।’’ उसने कहा, ‘‘यह कहना आसान है कि किसानों ने कानून हाथ में लिया, लेकिन वे जो कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, उसका क्या?’’ पार्टी ने दावा किया कि पंजाब के किसानों के स्वाभिमान से केन्द्र परेशान है। उसने कहा, ‘‘दिल्ली में हुई हिंसा के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं। सरकार जो चाहती थी, वह हुआ, लेकिन इसका खामियाजा किसानों और पुलिस को भुगतना पड़ा।’’ शिवसेना ने पूछा, ‘‘जो कुछ भी हुआ उसके लिए सरकार की जवाबदेही कौन तय करेगा?’’ उसने आरोप लगाया कि भाजपा के ‘‘खुफिया तंत्र’’ ने पाया कि हिंसा पूर्व नियोजित थी और “आतंकवादियों ने आंदोलन पर कब्जा कर लिया है”। शिवसेना ने कहा, ‘‘हिंसक प्रदर्शन का नेता दीप सिद्धू था,जो भाजपा से जुड़ा है। किसान नेताओं ने भी कहा कि सिद्धू पिछले दो महीने से किसानों को भड़का रहा था, लेकिन सभी ने संयम दिखाया।’’ 

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पार्टी ने पूछा, ‘‘ किसान चाहते हैं कि कृषि कानून निरस्त किए जाएं। लेकिन सरकार जिद पर क्यों अड़ी है?’’ इस बीच, महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने शिवसेना के केन्द्र पर लगाए आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘‘निराधार’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यह काफी दुखद है कि कुछ लोग राजनीति से ऊपर नहीं उठ पाते और किसानों के नाम पर अराजकता फैलाना चाहते हैं।’’ गौरतलब है कि कृषक संगठनों की केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के पक्ष में मंगलवार को हजारों की संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी। इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के अवरोधकों को तोड़ दिया और पुलिस के साथ झड़प व वाहनों में तोड़-फोड़ की और लाल किले पर एक धार्मिक ध्वज भी लगा दिया था। दिल्ली पुलिस ने हिंसा के मामले में कई प्राथमिकियां दर्ज की हैं।





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