Manikrao Kokate पर बॉम्बे हाईकोर्ट को छह महीने में फैसला लेने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह सरकारी आवास योजना से जुड़े धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे की पुनरीक्षण याचिका का छह माह के भीतर निस्तारण करे। शीर्ष अदालत ने मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक भी बरकरार रखी जिससे उन्हें विधायक के रूप में अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह सरकारी आवास योजना से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका का निस्तारण छह महीने के भीतर करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले में कोकाटे की दोषसिद्धि पर लगी रोक भी बरकरार रखी। शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को कोकाटे की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया था कि उन्हें विधायक के रूप में किसी प्रकार की अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 30,000 रुपये वार्षिक आय सीमा वाली सरकारी आवास योजना से जुड़ा यह मामला वर्ष 1989-92 का है। कोकाटे नासिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से विधायक हैं। मजिस्ट्रेट अदालत ने फरवरी 2025 में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
नासिक सत्र अदालत ने 16 दिसंबर को इस फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि कोकाटे और उनके भाई ने बेईमानी से राज्य सरकार को उन्हें फ्लैट आवंटित करने के लिए प्रेरित किया। बंबई उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2025 को धोखाधड़ी और जालसाजी के इस मामले में कोकाटे की दो वर्ष कारावास की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जो इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
कोकाटे पर आरोप है कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बनाई गई सरकारी आवास योजना में झूठे शपथपत्र देकर फ्लैट हासिल किया। उच्च न्यायालय ने कहा था कि मजिस्ट्रेट अदालत ने कोकाटे को केवल दो वर्ष की सजा सुनाई है और मुकदमे के दौरान तथा सत्र अदालत में अपील की सुनवाई के दौरान भी वह जमानत पर रहे थे, इसलिए उन्हें जमानत दी जा सकती है। उच्च न्यायालय में दायर अपनी अपील में कोकाटे ने अपनी दोषसिद्धि को मनमाना और गैरकानूनी बताया था।
विपक्ष द्वारा उनके इस्तीफे की मांग तेज किए जाने के बाद 17 दिसंबर को उनसे मंत्रालय के प्रभार वापस ले लिए गए थे। इसके अगले दिन 18 दिसंबर को उन्होंने महाराष्ट्र मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उसी रात नासिक पुलिस की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जारी वारंट का पालन करने के उद्देश्य से बांद्रा पहुंची थी।
नासिक सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि कोकाटे ने झूठे आय संबंधी शपथपत्र प्रस्तुत कर ‘राज्य को गुमराह’ किया और इस तरह अपने नाम फ्लैट आवंटित कराया। अदालत ने अंगूर और रबी फसलों के लिए लिए गए बैंक ऋण तथा कोपरगांव सहकारी साखर कारखाना (चीनी मिल) के अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा था कि कोकाटे एक समृद्ध किसान थे, जिनकी आय पात्रता सीमा से कहीं अधिक थी और वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में नहीं आते थे।
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