इधर उमर अब्दुल्ला वंदे मातरम् गा रहे हैं, उधर महबूबा मुफ्ती चाहती हैं पाकिस्तान से बात करे भारत

Omar Mehbooba
ANI

महबूबा ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय आउटसोर्सिंग, अस्थायी नियुक्तियों और कथित “बैकडोर” भर्ती पर अधिक निर्भर हो रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार को लेकर अनिश्चितता का असर केवल युवाओं पर नहीं, बल्कि डॉक्टरों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों पर भी पड़ रहा है।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी और आर्थिक संकट को लेकर सूबे की सरकार पर निशाना साधते-साधते पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती एक बार फिर पाकिस्तान और वहां के साथ संवाद के अपने पुराने राजनीतिक रुख की ओर लौटती नजर आईं। श्रीनगर में आयोजित एक पार्टी ज्वाइनिंग कार्यक्रम में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रोजगार की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर करीब 38 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

महबूबा ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय आउटसोर्सिंग, अस्थायी नियुक्तियों और कथित “बैकडोर” भर्ती पर अधिक निर्भर हो रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार को लेकर अनिश्चितता का असर केवल युवाओं पर नहीं, बल्कि डॉक्टरों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों पर भी पड़ रहा है।

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उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न वर्गों में जारी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टर, इंटर्न, पशु चिकित्सा कर्मचारी, नर्सिंग स्टाफ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। महबूबा के मुताबिक, बेरोजगारी के साथ-साथ बढ़ती महंगाई, कम वेतन और अपर्याप्त स्टाइपेंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि खासकर युवाओं में निराशा और “घुटन” का माहौल है और प्रशासनिक व्यवस्था भी अव्यवस्था का सामना कर रही है।

PDP अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी को मजबूत करने का उद्देश्य केवल सत्ता में वापस आना नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, PDP को जम्मू-कश्मीर के सामने मौजूद सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के खिलाफ लोगों की आवाज उठाने के लिए मजबूत होना होगा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में PDP ही ऐसी राजनीतिक ताकत है जो इन मुद्दों पर प्रभावी ढंग से आवाज उठा सकती है।

इस दौरान महबूबा ने PDP के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के दौर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में PDP के उभरने से जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ नई दिल्ली और इस्लामाबाद में भी राजनीतिक सोच पर असर पड़ा था। उन्होंने उस दौर में विभिन्न मार्गों को खोलने, संवाद प्रक्रिया शुरू करने और विकास संबंधी पहलों का उल्लेख किया।

महबूबा ने कहा कि पार्टी ने कई राजनीतिक तूफानों का सामना किया, लेकिन वह चुनौतियों के बीच मजबूती से खड़ी रही। उन्होंने उम्मीद जताई कि हालिया पार्टी ज्वाइनिंग से PDP को पूरे जम्मू-कश्मीर में और मजबूती मिलेगी।

इस तरह रोजगार, महंगाई और युवाओं की परेशानी के मुद्दे उठाते हुए महबूबा ने अपने भाषण में नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संवाद के पुराने दौर को भी राजनीतिक संदर्भ के रूप में सामने रखा, जिससे जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उनके पाकिस्तान संबंधी रुख की चर्चा फिर तेज हो सकती है। खास बात यह है कि ऐसे समय में जब उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम् गीत के पूर्ण गायन में भाग लेने पर उनकी सोच की देशभर में तारीफ हो रही है तभी महबूबा ने एक तरह से पाकिस्तान से वार्ता का रुख दोहरा कर राजनीति गर्मा दी है।

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