Gorkha समझौते का मसौदा बनाने के लिए MHA ने गठित की समिति, सांसद Raju Bista का बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सुकना में हुई बैठक के बाद केंद्र सरकार ने पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में यह कदम उठाया है। पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली यह समिति समझौते का अंतिम प्रारूप तैयार करेगी। इस बैठक में गोरखा समुदाय के विभिन्न प्रतिनिधि और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख नेता भी शामिल रहे।
दार्जिलिंग से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद राजू बिष्ट ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने गोरखा मुद्दे पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एक समिति गठित की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गोरखा नेताओं और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुई अहम बैठक के बाद बिष्ट ने यह जानकारी दी। इस बैठक का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से जारी समस्याओं के ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ के लिए आगे की रूपरेखा तय करना था।
शाह के उत्तर बंगाल दौरे के तीसरे और अंतिम दिन दार्जिलिंग की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में यह बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, पर्वतीय क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और अन्य हितधारक शामिल हुए। बिष्ट ने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय के तहत वार्ताकार पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।
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यह समिति आज हुए समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार करने का काम करेगी।’’ गृह मंत्रालय ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह को अक्टूबर 2025 में इस मुद्दे पर सरकार का आधिकारिक वार्ताकार नियुक्त किया था। उनकी भूमिका राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और गोरखा समुदाय की काफी समय से लंबित मांगों का समाधान तलाशने पर केंद्रित है। बिष्ट ने कहा कि शनिवार की बैठक एक ऐतिहासिक दिन पर हुई है क्योंकि 1988 में इसी तारीख को गोरखा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के बीच हुए इस समझौते के बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (डीजीएचसी) का गठन हुआ था। इससे पहले अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर हिंसक आंदोलन हुआ था। बिष्ट ने कहा, ‘‘पर्वतीय समुदायों का संघर्ष चार दशक से अधिक पुराना है।
इस दौरान पिछली वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को कुचला। हमारे करीब 2,000 लोगों ने जान गंवाई, 5,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए और महिलाओं को यातनाएं दी गईं तथा उनके साथ दुष्कर्म किया गया।’’ उन्होंने कहा कि बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं और अपेक्षाएं सामने रखीं तथा मुख्यमंत्री ने भी बताया कि वह पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के मुद्दों का समाधान किस तरह करना चाहते हैं। बिष्ट ने कहा, ‘‘सभी पक्षों की बात सुनने के बाद शाह ने बैठक का सार रखते हुए बताया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे का स्थायी समाधान किस प्रकार किया जाएगा।’’ बैठक में भाजपा के चुनावी वादे के अनुरूप संवैधानिक ढांचे के तहत दार्जिलिंग पहाड़ियों की समस्याओं का ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ तलाशने पर चर्चा हुई।
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बैठक में शुभेंदु अधिकारी के अलावा गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) प्रमुख बिमल गुरुंग, पार्टी के वरिष्ठ नेता रोशन गिरि, जीएनएलएफ प्रमुख मान घीसिंग, राज्य सरकार के कई मंत्री, पर्वतीय क्षेत्र के भाजपा विधायक और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। पिछली राज्य सरकारों ने डीजीएचसी और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इस मुद्दे के समाधान का प्रयास किया था, लेकिन इनसे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं हो सकी।
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