हार के बाद MK Stalin का DMK में मास्टरस्ट्रोक, तय की उम्र-कार्यकाल सीमा; युवा-महिला पर दांव

एमके स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके की हार के बाद पार्टी में बड़े संगठनात्मक बदलावों का ऐलान किया है। इन सुधारों में पार्टी पदाधिकारियों के लिए उम्र और कार्यकाल की सीमा तय करना, साथ ही शाखा सचिवों के लिए 45 साल की अधिकतम उम्र और दो कार्यकाल की सीमा शामिल है। स्टालिन का लक्ष्य इन कड़े फैसलों से युवाओं को नेतृत्व में लाना और पार्टी को अगले 100 सालों तक प्रासंगिक बनाए रखना है, ताकि डीएमके चुनावी वापसी कर सके।
DMK अपने संगठन में बड़े बदलाव करने जा रही है। पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पार्टी पदाधिकारियों के लिए नए नियम और ज़िला स्तर पर एक बड़ा ढांचा बनाने की घोषणा की है। ये बदलाव तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कुछ महीनों बाद हो रहे हैं। इस हार के कारण स्टालिन का मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल भी खत्म हो गया था। DMK की कार्यकारी समिति ने पार्टी के आगामी 16वें संगठनात्मक चुनावों के तहत इन प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी है।
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स्टालिन ने कहा कि पार्टी को चुनावी हार की वजहों पर चर्चा करने से बचने के बजाय अपनी कमियों पर गौर करना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर पार्टी के पदाधिकारियों के कामकाज का ज़िक्र किया और कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर हुई गलतियों का असर पूरे संगठन पर पड़ सकता है। स्टालिन ने कहा कि हालांकि हमारी हार की कई वजहें हैं, लेकिन पार्टी पदाधिकारियों का कामकाज भी उनमें से एक है। हमें इसे छिपाने की ज़रूरत नहीं है। हमें सबसे पहले अपनी गलतियों को मानना होगा। हमें उन्हें खुलकर स्वीकार करना होगा। भले ही गलती किसी एक व्यक्ति ने की हो, लेकिन उसका नुकसान 75 साल पुरानी पार्टी को उठाना पड़ता है।
उन्होंने DMK को वापसी करने में सक्षम पार्टी बताया और कहा कि वह राजनीतिक रूप से फिर से अहम भूमिका में आएगी। DMK प्रमुख ने कहा कि पार्टी मूलधन और ब्याज समेत इसका जवाब देगी। एक अहम बदलाव पार्टी के पदों के लिए उम्र और कार्यकाल की संख्या पर पाबंदियां लगाना होगा। स्टालिन ने कहा कि इस पुनर्गठन से युवा लोग संगठन के पदों पर आएंगे और पार्टी को लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि मैंने DMK के प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव करने का फ़ैसला किया है। ये बदलाव कड़े होंगे। इससे कुछ लोग निराश हो सकते हैं, लेकिन यह अच्छे मकसद के लिए होगा। मैं सभी के सहयोग की अपील करता हूं। इन बदलावों से DMK अगले 100 सालों तक मज़बूती से बनी रहेगी। हमारे कामों का मकसद युवाओं और महिलाओं का भरोसा फिर से जीतना होना चाहिए। हम पार्टी के पदों के लिए उम्र और कार्यकाल की सीमा तय कर रहे हैं। पार्टी के पदों के लिए नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत, ब्रांच सेक्रेटरी की उम्र 45 साल या उससे कम होनी चाहिए और वे ज़्यादा से ज़्यादा दो कार्यकाल तक ही इस पद पर रह सकते हैं।
पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया जाएगा। DMK जिलों की संख्या 77 से बढ़ाकर 110 कर दी जाएगी। नए ढांचे में मोटे तौर पर रेवेन्यू जिलों की सीमाओं का पालन किया जाएगा, और पार्टी का हर जिला आम तौर पर दो विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगा। जिन मामलों में पुनर्गठन के बाद सिर्फ़ एक विधानसभा क्षेत्र बचेगा, उसे उसी रेवेन्यू जिले के किसी दूसरे उपयुक्त पार्टी जिले के साथ मिला दिया जाएगा, जिससे वह उस यूनिट का तीसरा विधानसभा क्षेत्र बन जाएगा।
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