Mood Of Nation Survey: मणिपुर के मुख्‍यमंत्री से लोग खुश हैं या नाराज? जानें क्या कहता है ताजा सर्वे

Mood Of Nation Survey: मणिपुर के मुख्‍यमंत्री से लोग खुश हैं या नाराज? जानें क्या कहता है ताजा सर्वे

समाचार चैनल इंडिया टुडे ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के कामकाज को लेकर एक सर्वे किया है। जिसमें जनता से मुख्यमंत्री के कामकाज को लेकर सवाल पूछे गए हैं। मूड ऑफ़ नेशन के सर्वे के अनुसार मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह के कामकाज से करीब 39 % लोग संतुष्ट बताए जा रहे हैं।

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। पांच राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता वहां के मुख्यमंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करेगी और उसी आधार पर यह तय करेगी कि कौन कौन मौजूदा मुख्यमंत्री दोबारा से कुर्सी पर काबिज होंगे। पूर्वोत्तर का एक अहम राज्य मणिपुर भी उनमें से एक है। साठ सीटों वाली विधानसभा को समेटे इस प्रदेश में दूर तक फैली हरियाली, उदारवादी जलवायु और परंपरा का सुंदर मिश्रण देखने का मिलता है। वैसे अगर पूर्वोत्तर के राज्यों में असम को छोड़ दें तो बाकी किसी भी राज्य में होने वाले चुनावों में मीडिया की तरफ से खासा तवज्यो नहीं दी जाती है। लेकिन समाचार चैनल इंडिया टुडे ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के कामकाज को लेकर एक सर्वे किया है। जिसमें जनता से मुख्यमंत्री के कामकाज को लेकर सवाल पूछे गए हैं।

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क्या कहता है सर्वे

समाचार चैनल इंडिया टुडे ने मूल ऑफ नेशन नाम से ताजा सर्वे किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री के कामकाज से वहां की जनता कितनी संतुष्ट है और कितनी असंतुष्ट है। मूड ऑफ़ नेशन के सर्वे के अनुसार मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह के कामकाज से करीब 39 % लोग संतुष्ट बताए जा रहे हैं। जबकि 28 % लोग सीएम के कामकाज से असंतुष्ट दिखाई प्रतीत हुए हैं। जबकि 33 % लोगों का कहना है कि वो सीएम के कामकाज के तरीकों से असंतुष्ट हैं।   

मणिपुर में दो चरणों में चुनाव

मणिपुर एक छोटा राज्य है। यहां एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब 30 हजार वोटर ही होते हैं। इसलिए यहां की चुनावी रणनीति अन्य राज्यों से अलग है।  पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को वोटिंग होगी। जबकि 10 मार्च को नतीजे आएंगे। 2017 में भाजपा को 60 में 21 सीटें मिलीं थीं और उसे गठबंधन सरकार के लिए मजबूर होना पड़ा था। 28 सीटें जीत कर भी कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी।  





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