मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी कांड की कहानी! मजदूर की यातना से मौत, शव को बैग में भरकर ठिकाने लगाया, मुक्त कराए गये 12 मजदूरों ने खोले राज

Muzaffarnagar
प्रतिरूप फोटो
ANI
रेनू तिवारी । Jun 25 2026 12:13PM

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई से 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के मामले की जांच के दौरान पता चला है कि फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखे गए एक मजदूर की कथित यातना के कारण मौत हो गई थी और उसके शव को बैग में भरकर ठिकाने लगा दिया गया था।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और अमानवीय मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई (फैक्ट्री) में छापेमारी के बाद, बंधुआ मजदूरी के साथ-साथ एक मजदूर की यातना देकर हत्या करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि बंधक बनाकर रखे गए एक मजदूर की कथित तौर पर बेरहमी से प्रताड़ित करने के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद उसके शव को एक बैग में भरकर ठिकाने लगा दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार ने बृहस्पतिवार को बताया कि यह तथ्य इस सप्ताह तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक फैक्ट्री में हुई छापेमारी के बाद सामने आए बंधुआ मजदूरी मामले की जांच के दौरान उजागर हुआ।

एसएसपी के अनुसार, मृतक की पहचान अर्जुन के रूप में हुई है। आरोप है कि नवंबर 2025 में फैक्ट्री में उसे अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। बाद में उसके शव को एक बैग में भरकर फेंक दिया गया। मामले में पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया है। शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमों का गठन किया गया है। कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच और साक्ष्य जुटाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी गठित किया गया है। उधर, मुक्त कराए गए सभी 12 मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और उनका उपचार जारी है।

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पीड़ितों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं। जिला प्रशासन और श्रम विभाग संयुक्त रूप से पीड़ित श्रमिकों के पुनर्वास की प्रक्रिया में जुटे हैं। सरकारी योजनाओं के तहत उन्हें सहायता उपलब्ध कराने, बैंक खाते खुलवाने तथा उनके परिजनों से मिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक चार मजदूरों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा चुका है, जबकि अन्य श्रमिकों के परिजनों की तलाश जारी है। गौरतलब है कि 22 जून को प्रशासन और पुलिस ने मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री पर छापा मारकर नाबालिगों समेत 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि मजदूरों को विभिन्न राज्यों से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर लाया गया था।

हालांकि उन्हें न तो मजदूरी दी गई और न ही फैक्ट्री परिसर से बाहर जाने की अनुमति थी। आरोप है कि उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक फैक्ट्री में कैद रखकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया गया। बचाए गए कई मजदूरों के शरीर पर चोट और यातना के निशान पाए गए। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि फैक्ट्री छोड़ने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी।

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पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेरहमी से पीटा गया, भाले से हमला किया गया, कोड़े मारे गए, कुत्तों से कटवाया गया और यहां तक कि जानवरों का चारा खाने के लिए मजबूर किया गया। इससे पहले पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अंकित बालियान अब भी फरार है।

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