Nitin Gadkari Deepfake Case: सोशल मीडिया जवाबदेही पर Bombay High Court में 5 अगस्त को अहम सुनवाई

Gadkari
ANI
अभिनय आकाश । Jul 28 2026 3:52PM

अपने सिविल मुकदमे में गडकरी ने सभी फर्जी और मनगढ़ंत कंटेंट को तुरंत हटाने और इसके प्रसार पर स्थायी रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पोस्ट में उन्हें इथेनॉल-मिश्रित ईंधन कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उन्हें और उनके परिवार को इससे आर्थिक लाभ हुआ है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 5 अगस्त को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से मेटा, एक्स कॉर्प, गूगल LLC और अज्ञात लोगों के खिलाफ दायर मुकदमे पर सुनवाई करेगा। यह मुकदमा इथेनॉल पॉलिसी से जुड़े कथित तौर पर मानहानि करने वाले डीपफेक और AI से बने पोस्ट के संबंध में दायर किया गया है। अपने सिविल मुकदमे में गडकरी ने सभी फर्जी और मनगढ़ंत कंटेंट को तुरंत हटाने और इसके प्रसार पर स्थायी रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पोस्ट में उन्हें इथेनॉल-मिश्रित ईंधन कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उन्हें और उनके परिवार को इससे आर्थिक लाभ हुआ है। जस्टिस आरिफ डॉक्टर की बेंच ने गडकरी के वकील संदीप लड्डा को निर्देश दिया कि वे प्रतिवादियों को मुकदमे की कॉपी सौंपें। याचिका में कहा गया है कि इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के मुद्दे पर कई फर्जी, AI-जनरेटेड और मानहानि करने वाली पोस्ट ऑनलाइन मौजूद थीं।

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मुकदमे के अनुसार, अज्ञात लोगों ने ऐसी पोस्ट और डीपफेक कंटेंट अपलोड और प्रसारित किए, जिनमें गडकरी को गलत तरीके से इस कार्यक्रम से जोड़ा गया और उन पर तथा उनके परिवार पर आरोप लगाए गए। याचिका में कहा गया है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों को अपूरणीय क्षति हुई है। मुकदमे में ऑनलाइन पोस्ट में लगाए गए आरोपों को "बिना किसी शक के झूठा, दुर्भावनापूर्ण और घोर मानहानिपूर्ण" बताया गया और कहा गया कि इनका मकसद गडकरी के खिलाफ लोगों में गलत धारणा बनाना था। इसमें यह भी कहा गया कि इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम और E20 पॉलिसी का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि वे खुद व्यक्तिगत रूप से। याचिका में कहा गया कि इसका मकसद निष्पक्ष सार्वजनिक बहस या सही नीयत से की गई टिप्पणी को रोकना नहीं था, लेकिन इसमें यह तर्क दिया गया कि गैर-जिम्मेदाराना और मानहानि करने वाले आरोप कानूनी अभिव्यक्ति की सीमा पार कर गए थे। अदालत अब इस मामले पर 5 अगस्त को सुनवाई करेगी।

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