अब फिर से नए आंदोलन की तैयारी में जुटे राकेश टिकैत, 26 नवंबर को सरकार के खिलाफ भरेंगे हुंकार

Rakesh Tikait
ANI
अंकित सिंह । Sep 29, 2022 12:22PM
राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई बड़े वादे किए गए थे। लेकिन सरकार ने जो भी वादा किया, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हम फिर से आंदोलन करने को विवश हुए हैं।

लगभग 1 साल तक चले किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले राकेश टिकैत एक बार फिर से सरकार के खिलाफ हुंकार भरने की तैयारी कर रहे हैं। खबर के मुताबिक 26 नवंबर को राकेश  टिकैत फिर से सरकार के खिलाफ हल्ला बोल करने वाले हैं। इसके लिए तैयारी भी की जा रही है। दरअसल, 26 नवंबर 2020 को दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी। राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई बड़े वादे किए गए थे। लेकिन सरकार ने जो भी वादा किया, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हम फिर से आंदोलन करने को विवश हुए हैं। इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के साथ तैयारी में लगा हुआ है और योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। 

इसे भी पढ़ें: 'हमने लाइसेंस राज को किया खत्म', जेपी नड्डा बोले- मोदी सरकार में हुआ समग्र विकास

राकेश टिकैत ने कहा कि इस संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के साथ मिलकर 26 नवंबर को देश भर में आंदोलन करेगा। इस दौरान हर राज्य के राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। साथ ही साथ जिला प्रशासन को भी यह ज्ञापन दिया जाएगा। आपको बता दें कि 26 नवंबर 2020 को दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। इस किसान आंदोलन का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा कर रहा था। राकेश टिकैत जबरदस्त तरीके से मीडिया की सुर्खियों में बने रहे थे। यही कारण है कि राकेश टिकैत ने एक बार फिर से सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का एलान कर दिया है। राकेश टिकैत अपनी मांगों को लेकर 26 नवंबर को फिर से हुंकार भरेंगे।

इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार की नीतियों की बदौलत कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़े हैं रोजगार के अवसर

राकेश टिकैत ने पत्रकारों से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि सरकार ने ना तो एमएसपी की मांग को पूरी की है, ना ही गन्ने के दाम को बढ़ाएं हैं। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय मुद्दों को भी हल नहीं किया गया है। गांव में लोगों का हाल बुरा है। सरकार बातचीत को तैयार नहीं है। पुलिस की मदद से लगातार आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर कोई बोलने की कोशिश भी करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह से हुकूमत नहीं चलती है। हुकूमत चलाने के लिए बातचीत करनी पड़ती है। वहीं, पीएफआई पर लगे पाबंदी पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि इस तरह के संगठन के लोगों की तस्वीरें चौराहे पर लगनी चाहिए। इस तरह के संगठन से किसी को जुड़ना भी नहीं चाहिए।

अन्य न्यूज़