DUSU चुनाव में धांधली के आरोपों पर Delhi High Court का निर्देश, तय समय में जांच कर फैसला लें अधिकारी

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अभिनय आकाश । Sep 30 2026 12:44PM

दिल्ली हाई कोर्ट ने डूसू अध्यक्ष चुनाव के नतीजों को चुनौती देने वाली एनएसयूआई उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चुनाव में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की जांच करने और तय समय-सीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस चुनाव में एबीवीपी के यश डबास विजयी हुए थे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के 2026-27 के प्रेसिडेंट चुनाव के नतीजों को चुनौती दी थी। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मीणा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करें और तय समय-सीमा के भीतर उनकी शिकायत पर फैसला लें। मीणा ने 19 सितंबर को घोषित नतीजों को चुनौती दी थी, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार यश डबास 24,576 वोटों के साथ DUSU प्रेसिडेंट चुने गए थे। मीणा को 22,523 वोट मिले थे और डबास 2,053 वोटों के अंतर से जीते थे। यह याचिका वकील विमल त्यागी और बालाजी पाठक के ज़रिए दायर की गई थी। मीना ने संविधान के अनुच्छेद 226 का हवाला देते हुए चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड, जिनमें EVM और वोटों की गिनती के रिकॉर्ड शामिल हैं, की मांग की। NSUI उम्मीदवार ने चुनाव कराने में कई गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। उनकी याचिका के अनुसार, कुछ कॉलेजों के प्रिंसिपल, प्रोफेसर और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ ने संस्थागत निष्पक्षता बनाए रखने की ज़रूरत के बावजूद कुछ खास उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया।

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े कुछ अधिकारी और यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्य प्रचार में शामिल हुए, जो लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और DUSU के आदर्श आचार संहिता के तहत निष्पक्षता की शर्तों के खिलाफ था। हाई कोर्ट के सामने उठाया गया एक और मुद्दा अलग-अलग कॉलेजों में वोटिंग प्रतिशत में अंतर से जुड़ा था। मीना की याचिका के अनुसार, 1.51 लाख से ज़्यादा योग्य वोटरों में कुल वोटिंग प्रतिशत 40.46% था, जबकि कुछ कॉलेजों में कथित तौर पर 80% तक वोटिंग हुई। उन्होंने खास तौर पर अदिति महाविद्यालय, भगिनी निवेदिता कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, शिवाजी कॉलेज और मोतीलाल नेहरू कॉलेज (मॉर्निंग) में वोटिंग के आंकड़ों पर सवाल उठाए। मीना का तर्क था कि इन कथित गड़बड़ियों की जांच ज़रूरी है, खासकर इसलिए क्योंकि प्रेसिडेंट पद का चुनाव 2,053 वोटों के अंतर से तय हुआ था। उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी अधिकारियों के सामने एक शिकायत और आवेदन दिया था, जिसमें कथित गड़बड़ियों की जांच और CCTV फुटेज व चुनाव से जुड़े अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। 

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एक अंतरिम अर्जी में उन्होंने संबंधित कॉलेजों के पोलिंग बूथ, वोटों की गिनती वाली जगहों और कॉमन एरिया के CCTV फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने की भी मांग की थी। उनका तर्क था कि आम तौर पर फुटेज को कुछ समय बाद मिटा दिया जाता है या उस पर नया डेटा रिकॉर्ड हो जाता है, जिससे पुराना फुटेज मिट सकता है। याचिका में वोटों की दोबारा गिनती और उनकी चुनौती पर विचार होने तक पद संभालने की प्रक्रिया में यथास्थिति बनाए रखने की भी मांग की गई थी। मीना ने छात्र चुनावों के लिए लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान यूनिवर्सिटी और कॉलेज अधिकारियों को संस्थागत निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। DUSU चुनाव में 52 पोलिंग सेंटरों पर 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ। अध्यक्ष पद का चुनाव डबास ने जीता, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया।

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