संगठन सृजन अभियान महत्वपूर्ण, प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी हो : अशोक गहलोत

Ashok Gehlot
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गहलोत ने कहा कि जो भी व्यक्ति जिलाध्यक्ष बने उसका कर्तव्य है कि वह संगठन में सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करे, सबको साथ लेकर चले क्योंकि यह संगठन है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संगठन सृजन अभियान को कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए शुक्रवार को कहा कि इसकी प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज देश को कांग्रेस की जरुरत है।

राजस्थान में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए चल रहे संगठन सृजन अभियान संबंधी एक सवाल पर गहलोत ने कहा, ये कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है हमारे लिए। कांग्रेस के उदयपुर अधिवेशन के बाद, उदयपुर घोषणापत्र से तय हुआ। उसी ढंग से ही राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खरगे ने ये कार्यक्रम शुरू किया कि तमाम जिलों में 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति अध्यक्ष बनने चाहिए।

गहलोत के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि निष्पक्ष होकर, असली फीडबैक हमारे पास आए। यह तभी आएगा जब कोई नेता पंचायती नहीं करे। वह टेलीफोन नहीं करे जिलों में या पर्यवेक्षकों से बात नहीं करे। उन्हें अपनी भावना नहीं बताए। वह जिले में नेताओं को फोन नहीं करे कि आप इसका समर्थन करो, इसका समर्थन मत करो। इस तरह से यह प्रक्रिया पूरी होगी तब जाकर ईमानदारी से अच्छे लोग अध्यक्ष बन पाएंगे। उन्होंने कहा कि इसको लेकर ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं होना चाहिए कि अमुक आदमी को हम ये अधिकार देते हैं।

इस मुद्दे पर अपने रुख को दोहराते हुए गहलोत ने कहा, मेरा रुख आज भी वही है। मैं चाहता हूं कि ईमानदारी से यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। गहलोत ने कहा कि जो भी व्यक्ति जिलाध्यक्ष बने उसका कर्तव्य है कि वह संगठन में सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करे, सबको साथ लेकर चले क्योंकि यह संगठन है।

उन्होंने कहा, मंत्री के लिए संभव है कि वह किसी का काम करे किसी का न करे लेकिन जो संगठन का आदमी होता है चाहे वह किसी भी पार्टी का हो .... प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष बनाना बड़ा मुश्किल होता है। मंत्री बनाना आसान होता है। मै यह बात कांग्रेस में कहता रहता हूं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज देश को आवश्यकता कांग्रेस पार्टी की है क्योंकि कांग्रेस पार्टी सभी धर्मों और सभी जातियों को साथ लेकर चलती है। उन्होंने कहा, इसलिए कांग्रेस पार्टी का मजबूत होना आवश्यक है ये मेरा मानना है। और यह मजबूत तब होगी जब हम लोग मतभेद भुलाकर काम करें।

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