पाकिस्तान ड्रोन से हथियार गिराता है और भारत संजीवनी बूटी, जम्मू के फलक पर वैक्सीन की एयर डिलीवरी

पाकिस्तान ड्रोन से हथियार गिराता है और भारत संजीवनी बूटी, जम्मू के फलक पर वैक्सीन की एयर डिलीवरी

वैक्सीन लेकर ड्रोन जम्मू के बॉर्डर इलाके तक पहुंची। ये ड्रोन 20 किलोग्राम तक का भार उठाने में सक्षम है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। ड्रोन की गति 36 किलोमीटर प्रति घंटा है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह के समक्ष इसका ट्रायल शुरू हुआ।

जम्मू के फलक पर आज शांतिदूत ने परवाज क्या भरी पाकिस्तान तिलमिला गया है। पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में ड्रोन के जरिये हथियार ड्राप कर रहा है। तो दूसरी ओर आज जम्मू में कोविड वैक्सीन पहुंचाने के लिए ड्रोन का सहारा लिया गया। वैक्सीन लेकर ड्रोन जम्मू के बॉर्डर इलाके तक पहुंची। ये ड्रोन 20 किलोग्राम तक का भार उठाने में सक्षम है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। ड्रोन की गति 36 किलोमीटर प्रति घंटा है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह के समक्ष इसका ट्रायल शुरू हुआ।

कोविड यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया 

इस मौके पर मौजूद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की कोविड यात्रा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। आधुनिक भारत के आधुनिक विज्ञान का आधुनिक यंत्र ड्रोन आज एक नया अवतार ग्रहण करेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम सभी के लिए ये गर्व की बात है कि भारत में जन्मा ये ड्रोन आज से कोविड वारियर कहलाएगा। जितेंद्र सिंह ने कहा कि पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय क्षेत्र में हथियार गिराने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए करता है लेकिन भारत इनका प्रयोग मानवता की सेवा के लिए करता है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री सिंह ने कहा, “पाकिस्तान अपने ड्रोन का इस्तेमाल लोगों को नुकसान पहुंचाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए करता है लेकिन हमारे ड्रोन मानवता की भलाई के लिए ‘संजीवनी बूटी’ ले जाने के रूप में काम करेंगे और इससे शांति का संदेश जाएगा।”

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ड्रोन की क्या है खासियत 

इस ड्रोन का इस्तेमाल जम्मू कश्मीर के दूर दराज के इलाके जहां पर सरकार-प्रशासन के लिए जरूरत की चीजें पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। खासतौर से जब भी कभी मेडिकल इमरजेंसी होती है और दवाईयां पहुंचानी होती है। ऐसी सूरत में इस ड्रोन का इस्तेमाल सरकार द्वारा किया जा सकेगा। जीपीएस निर्देशित उक्त ड्रोन को राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाएं (एनएएल) ने विकसित किया है जो वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक इकाई है। उन्होंने कहा कि इस ड्रोन की रेंज 55 किलोमीटर तक है और यह 20 किलोग्राम तक भार वहन कर सकता है। क्वाड कॉप्टर ड्रोन की बात करे तो इसके 8 विंग्स हैं। ये ड्रोन पूरी तरह से जीपीएस पर काम करता है, लेकिन अगर जीपीएस फेल भी हो जाते हैं तो इंटरनल सेंसर के जरिये ये आसानी से लैंडिंग कर सकता है।





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