Pakistani जासूसी रैकेट का भंडाफोड़, NIA Court ने मास्टरमाइंड को सुनाई 5 साल की सजा

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अभिनय आकाश । Jan 28 2026 7:45PM

एनआईए द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी और इनकी अधिकतम अवधि 5.5 वर्ष होगी। इसमें कहा गया है कि सीमा पार साजिश के इस मामले में खुले समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान पाकिस्तानी नौसेना द्वारा गिरफ्तार किए गए मछुआरों के भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल शामिल था।

विशेष एनआईए अदालत ने सिम कार्ड के फर्जी इस्तेमाल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से जुड़े पाकिस्तान के नेतृत्व वाले जासूसी षड्यंत्र मामले में एक प्रमुख आरोपी को पांच साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि आरोपी अल्ताफहुसेन घनचीभाई उर्फ ​​शकील ने मुकदमे के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया था, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा 37 गवाहों से पूछताछ की गई थी। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मंगलवार को आरोपी को सिम कार्ड, वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) और सोशल मीडिया सहित विशिष्ट पहचान सुविधाओं के दुरुपयोग का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। तदनुसार, घनचीभाई को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (षड्यंत्र आदि के लिए सजा) के तहत पांच साल छह महीने के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी (पहचान की चोरी के लिए सजा) के तहत दो साल छह महीने के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

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एनआईए द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी और इनकी अधिकतम अवधि 5.5 वर्ष होगी। इसमें कहा गया है कि सीमा पार साजिश के इस मामले में खुले समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान पाकिस्तानी नौसेना द्वारा गिरफ्तार किए गए मछुआरों के भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल शामिल था। जांच एजेंसी ने बताया कि इन मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड पाकिस्तानी नौसेना ने जब्त कर लिए थे और बाद में आरोपियों ने भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इन्हें सक्रिय कर दिया था। जांच एजेंसी ने बताया कि जब्त किए गए इन मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड बाद में आरोपियों ने भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सक्रिय कर दिए थे।

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एनआईए की जांच में यह स्पष्ट रूप से साबित हुआ कि आरोपियों ने अपने मोबाइल में भारतीय सिम कार्ड डाले और ओटीपी जनरेट किए, जिन्हें उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों (पीआईओ) के साथ साझा किया, जिससे वे पाकिस्तान से भारतीय व्हाट्सएप नंबरों का संचालन कर सके।

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