Bomb Threat in Haridwar | हरिद्वार में मचा हड़कंप! 'हर की पौड़ी' को बम से उड़ाने की धमकी, साजिश रचने वाला आरोपी गिरफ्तार

Har Ki Pauri
ANI
रेनू तिवारी । May 18 2026 11:58AM

पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एक सिरफिरे व्यक्ति ने उत्तराखंड पुलिस के आपातकालीन सेवा नंबर 112 पर फोन किया था। कॉल करने वाले ने बेहद आक्रामक लहजे में दावा किया कि अगले चार दिनों के भीतर हर की पौड़ी समेत हरिद्वार की कई अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके किए जाएँगे।

उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल हरिद्वार में सोमवार को उस समय भारी सनसनी और दहशत फैल गई, जब एक अज्ञात कॉलर ने प्रसिद्ध 'हर की पौड़ी' घाट को बम से उड़ाने की खौफनाक धमकी दी। पुलिस के आपातकालीन नंबर पर सीधे आए इस कॉल के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील इस धार्मिक स्थल की सुरक्षा तुरंत बढ़ा दी गई और पुलिस प्रशासन हाई अलर्ट मोड पर आ गया।

अधिकारियों के अनुसार, नशे में धुत एक व्यक्ति ने आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया और दावा किया कि चार दिनों के भीतर हर की पौड़ी और कई अन्य जगहों पर बम धमाके किए जाएँगे। इस कॉल के बाद पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रखा गया और तत्काल कई टीमों को सक्रिय कर दिया गया।

कॉलर का फोन नंबर और लोकेशन तुरंत ट्रेस कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया; उसकी पहचान पौड़ी जिले के यमकेश्वर निवासी 30 वर्षीय सोहन सिंह रावत के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान, उस व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसने नशे की हालत में यह धमकी दी थी।

हरिद्वार नगर कोतवाली में मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी को अब जेल भेज दिया गया है। हरिद्वार के SSP नवनीत सिंह भुल्लर ने भी इस घटना के संबंध में एक बयान जारी किया है।


हर की पौड़ी का इतना अधिक महत्व क्यों है?

हर की पौड़ी हरिद्वार का सबसे पूजनीय घाट है और यह पूरे भारत तथा विदेशों से आने वाले तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। माना जाता है कि इस घाट का संबंध भगवान विष्णु से है। श्रद्धालु यहाँ पवित्र डुबकी लगाने को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने वाला मानते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हर की पौड़ी पर शाम के समय होने वाली गंगा आरती एक अद्भुत दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस क्षेत्र में हर 12 साल में भव्य कुंभ मेला और हर छह साल में अर्द्ध कुंभ मेला आयोजित होता है, जो इसे देश के सबसे अधिक आध्यात्मिक रूप से जीवंत स्थानों में से एक बनाता है।

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