जेल में प्रिटिंग, आर्मी कैंप में प्रश्नपत्र तैयार, करेंसी से ज्यादा सिक्योरिटी, NEET पेपर लीक के बीच चीन मॉडल की क्यों हो रही इतनी चर्चा

3 मई को ऑलरेडी कंडक्ट हो चुका एग्ज़ाम अब फिर से होगा। ऐसे में सवाल है कि आखिर कब तक इस देश में लाखों बच्चों से कहा जाएगा कि बच्चे तुम ना फिर से तैयारी कर लो। एग्जाम जो है वो कैंसिल हो गया।
अभी 3 मई की रात को करीब 23 लाख बच्चों ने महीनों बाद पहली बार सुकून की सांस ली थी। किसी ने मां से कहा कि मम्मी पेपर अच्छा हो गया। किसी ने पापा से कहा कि शायद सरकारी नौकरी मिल जाएगी। मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा। उन लाखों बच्चों को लग रहा था कि उनकी जिंदगी जो है वह बदलने वाली है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद ये खबर आती है जिसने उनकी दुनिया को हिला कर दिया है। पेपर लीक की शिकायतों के बाद नीट एग्ज़ाम रद्द हो गया है। 3 मई को ऑलरेडी कंडक्ट हो चुका एग्ज़ाम अब फिर से होगा। ऐसे में सवाल है कि आखिर कब तक इस देश में लाखों बच्चों से कहा जाएगा कि बच्चे तुम ना फिर से तैयारी कर लो। एग्जाम जो है वो कैंसिल हो गया। आखिर कब तक इस देश में बच्चे पेपर लीक, करप्शन और सिस्टम की नाकामियों का बोझ उठाते रहेंगे? एक बच्चा है जिसकी दुनिया स्कूल, कोचिंग, टेस्ट सीरीज और चार दीवारी के एक छोटे से कमरे तक सिमट चुकी थी। जिसने महीनों से सालों से अपने दोस्तों से दूरियां बनाई थी। वो त्यौहार पर अपने घर नहीं गया। उसने मोबाइल फोन छोड़ दिया। उसने क्रिकेट खेलना छोड़ दिया। आईपीएल देखना छोड़ दिया। दोस्तों के साथ मौज मस्ती, बाहर घूमना फिरना छोड़ दिया। क्योंकि उसे यह बताया गया था उसके टीचर्स, उसके पेरेंट्स के थ्रू कि बच्चे मेहनत कर लो जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन अचानक सिस्टम एक दिन कहता है कि एग्जाम कैंसिल हो चुका है। उसी पल उन लाखों बच्चों को ऐसा लगता है जैसे उनकी मेहनत नहीं उनके भरोसे को खत्म कर दिया गया हो। उनकी जिंदगी उन्हें करियर से खिलवाड़ कर दिया गया हो।
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तब और अब में क्या चदल गया?
2024 में लीक स्थानीय (पटना और गोधरा) था, जबकि 2026 में डिजिटल प्रसार के कारण यह राष्ट्रव्यापी हो गया।
तब बचाव की नीति थी, 2026 में जीरो टॉलरेंस के तहत तुरंत फैसला।
अब सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम लागू है। इसमें सजा जुर्माना ज्यादा है।
दूसरे देशों में कैसे कानून हैं?
चीनः नकल या पेपर लीक पर 7 साल तक वेल। इसे 'देशद्रोह जैस्स मानते हैं।
बांगलादेश, द. कोरिया पेपर लीक पर 10 साल तक की बेल और आजीवन ब्लैकलिस्ट करने का सख्त नियम।
अल्जीरियाः परीक्षा के दौरान देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन व जेल का प्रावधान।
अभ्यर्थियों पर क्या असर होगा?
दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता, तैयारी की लय टूटना बड़ा मनोवैज्ञानिक बोइा। परीक्षा और काउंसलिंग उत्लने से पूरा शैक्षणिक सत्र पिछड़ जाता है, जिससे
मेडिकल शिक्षा का समय बढ़ जाता है।
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आरोपियों के लिए क्या सजा?
नीट 2024 के बाद बने 'सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 में सख्ती
संगठित पेपर लीक के लिए 5-10 वर्ष की जेल। न्यूनतम 1 करोड़ रु. जुर्माना। परीक्षा कराने वाली एजेंसी से पूरी लागत वसूलेंगे। 4 साल बैन भी संभव। ऐसे केस में दोषसिद्दिध की दर कम है।
परीक्षा में कितना खर्च आता है?
23 लाख बच्चों को परीक्षा पर लगभग 400-500 करोड़ रु. खर्च आ सकता है। इसमें प्रश्नपत्रों को छपाई, सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्रों का किराया और स्टाफ का मानदेय शामिल है। छात्रों से दोचारा फीस नहीं ली जाएगी। मतलब है कि इसका पूरा खर्च एजेंसी उठाद्गी।
ये सुझाव पहले मान लिए जाते तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती
करीब 24 लाख स्टूडेंट्स का फ्यूचर अब दांव पर है। लेकिन कुछ ऐसे काम हैं जो अगर पहले हो गए होते अगर वो सुझाव मान लिए जाते तो शायद यह नौबत ना आती। बात यह है कि साल 2024 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की ओर से पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी ऑन एजुकेशन वुमेन चिल्ड्रन यूथ एंड स्पोर्ट्स बनाई गई थी। जिसके चेयर पर्सन थे कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। इस कमेटी ने पेपर लीक्स रोकने के लिए कुछ सुझाव दिए थे। पहला सुझाव था प्राइवेट वेंडर्स पर डिपेंडेंसी कम करना। पैनल ने इस बात पर फोकस किया था कि पेपर हैंडलिंग, एग्जाम, लॉजिस्टिक्स, टेक्निकल सपोर्ट्स के लिए गवर्नमेंट इंस्टीटशंस प्राइवेट वेंडर्स का सपोर्ट लेते हैं। यह पूरे एग्जाम सिस्टम को वनरेबल बनाता है। अगर कोई प्राइवेट वेंडर गड़बड़ी करता है तो उसे हमेशा के लिए ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए। दूसरा सुझाव था फंड का बेहतर इस्तेमाल। पैनल ने एक जरूरी सवाल उठाया था कि जब एग्जाम सिस्टम के लिए करोड़ों रुपए का फंड एलोकेट किया जाता है तो उस फंड का इस्तेमाल एग्जाम सिक्योरिटी के लिए क्यों नहीं होता? इस दिशा में फंड का ज्यादा से ज्यादा और बेहतर से बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए। तीसरा सुझाव था एग्जाम सेंटर का चुनाव। कमेटी ने ऑनलाइन एग्जामिनेशन पर संदेश जताया। सुझाव दिया कि अगर कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम हो तो सिर्फ और सिर्फ गवर्नमेंट सेंटर्स पर हो। मतलब पेन पेपर सिस्टम पर जोर दिया गया था। चौथा सुझाव था एनटीए को यूपीएससी पैटर्न समझना चाहिए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी कि एनटीए जो नीट एग्जाम कंडक्ट कराती है उसे यूपीएससी एग्जाम पैटर्न को समझना चाहिए। कमेटी का यह भी मानना है कि यूपीएससी का एग्जाम पैटर्न कंपैरेटिवली फेयर और ट्रांसपेरेंट होता है। सुझाव सुनने में तो बहुत अच्छे हैं, लेकिन फिर मन में सवाल आता है कि इन्हें अब तक लागू क्यों नहीं किया गया?
स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम: करीब 22 से 24 लाख स्टूडेंट्स नीट अपीयर करते हैं। ऐसे में गवर्नमेंट एजेंसीज के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है कि वो बिना प्राइवेट वेंडर्स की सहायता के इंफ्रास्ट्रक्चर हैंडल करें।
पेन पेपर मोड वर्सेस कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम एक तरफ दिग्विजय सिंह की कमेटी इस बात पर जोर देती है कि बेटर ट्रांसपेरेंसी के लिए पेन पेपर मोड ही एग्जाम के लिए ठीक है। वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से अपॉइंटंटेड के राधाकृष्णन कमिटी जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस ट्रैकिंग, एआई मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं वाले एग्जाम्स पर जोर देती है। इन सजेशन को गवर्नमेंट अभी इवैल्यूएट कर रही है। अंडर कंसीडरेशन है। मतलब इंप्लीमेंट नहीं हो पाए हैं। हो जाते तो शायद पेपर लीक नहीं होता।
एनटीए प्रमुख बोले- हम जिम्मेदारी लेते हैं...
दोबारा परीक्षा कराने की प्रक्रिया 7-10 दिन में शुरू हो जाएगी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा, 'जो कुछ भी हुआ हम उसकी जिम्मेदारी लेते हैं, यह गलत था। दोबारा परीक्षा की तारीख के लिए मैं अपनी टीम के साथ बैठक करूंगा। अगले कुछ दिनों में पूरा परीक्षा शेड्यूल और तारीखें घोषित कर दी जएंगी। हमारी कोशिश होगी कि कम से कम समय में परीक्षा हो जाए ताकि शैक्षणिक कैलेंडर और प्रवेश प्रक्रिया बाधित
इतने बड़े नेशनल एग्जाम्स बार-बार विवादों में क्यों
पिछले कई सालों में एनटीए बार-बार अलग-अलग कंट्रोवर्सीज को लेकर सवालों घेरे में है। 2019 में जब एनटीए ने पहली बार नीट एग्जाम कराया तब आंसर की को लेकर विवाद हुआ। 2020 में जेईई मेंस में विवाद हुआ। उसी साल नीट यूजी में मध्य प्रदेश की एक छात्रा को सिर्फ छह नंबर दिए गए। लेकिन बाद में ओएमआर मिलान से उसके करीब 590 मार्क्स निकले। अब सोचिए कि एक सिस्टम की गलती ने बच्ची से उसका भविष्य नहीं बल्कि जिंदगी तक छीन ली थी। इसके बाद 2022 में जेईई मेंस के दौरान टेक्निकल ग्लिचेस की शिकायतें आई। 2024 में नीट कंट्रोवर्सी ने पूरे देश को हिलाया। 67 स्टूडेंट्स के फुल मार्क्स, ग्रेस मार्क्स के विवाद और पेपर लीक के आरोपों ने लाखों बच्चों के भरोसों को अंदर तोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तक यह मान लिया कि पेपर लीक हुआ था। लेकिन पूरे एग्जाम में सिस्टमैटिक ब्रीच साबित नहीं होने के चलते तब उस बार री एग्जाम नहीं कराया गया। और 2026 में जब आया तो फिर वही डर, फिर वही गुस्सा, फिर वही सवाल, फिर वही कहानी।
चीन में कैसे होती है लीक प्रूफ परीक्षा
चीन की सरकारी टीवी सीसीटीवी ने बताया कि परीक्षा से 3 महीने पहले सेकेंडरी स्कूलों और विश्वविद्यालयों से कुछ सीनियर टीचर्स को टेस्ट पेपर्स डिजाइन करने के लिए चुना जाता है। इन बाद इन शिक्षकों को बीजिंग के दूर-दराज और सुनसान इलाकों जैसे मिलिट्री कैंपों या जेलों में भेजा जाता है, ताकि एग्जाम के सवाल बनाने से पहले उन्हें गोपनीयता बनाए रखने की ट्रेनिंग दी जा सके। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार टेस्ट पेपर शिक्षा मंत्रालय और नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन दोनों के अधिकार में जेलों में प्रिंट किए जाते हैं। हर प्रिंट वर्कशॉप में कैमरे और गार्ड जैसे 24 घंटे सुरक्षा के कई तरीके होते हैं। टेस्ट पेपर की प्रिंटिंग के बाद इसे हथियारबंद गार्ड पूरे देश में ले जाते हैं। इनकी सुरक्षा बैकों और कैश ले जाने वाली आर्मर्ड गाड़ियों से भी ज़्यादा होती है। द गार्जियन की रिपोर्ट के चीन की बड़ी टेक कंपनियां सरकार के आदेश पर कॉम्पिटिटिव यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम के दौरान चीटिंग रोकने के लिए कई एप के AI फंक्शन बंद कर दिए हैं।
बहरहाल, पेपर लीक या एग्जाम कैंसिल होने की जब खबर आती है तो सरकार को यह समझना चाहिए। सिर्फ एक परीक्षा नहीं टूटती है। लाखों बच्चों का सिस्टम से भरोसा टूट जाता है। चंद लोगों की लापरवाही, चंद लोगों करप्शन और 23 लाख बच्चों की जिंदगी जो है उसे मजाक बनाकर रख दिया गया है।
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