CAA और NPR पर बोले पासवान, संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का दिया है अधिकार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 21, 2020   09:25
CAA और NPR पर बोले पासवान, संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का दिया है अधिकार

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने सीएए एवं एनपीआर को सही ठहराते हुए इसका विरोध करने वालों के बारे में सोमवार को कहा कि संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है।

पटना। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने सीएए एवं एनपीआर को सही ठहराते हुए इसका विरोध करने वालों के बारे में सोमवार को कहा कि संविधान ने सभी को अपनी बात रखने का अधिकार दिया है। पटना में आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामविलास ने कहा चाहे कोई भी सरकार हो, किसी सरकार की हिम्मत नहीं है कि भारतीय नागरिक चाहे, हिंदू, मुसलमान, सिख या इसाई हो उसकी नागरिकता खत्म कर दे।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में नीतीश करेंगे NDA का प्रचार, PK कहेंगे केजरीवाल फिर एक बार

उन्होंने सीएए को लेकर दलित वर्ग के बीच भ्रांति पैदा किए जाने की बात करते हुए कहा कि उन्हें स्वयं का भी असली जन्मदिन मालूम नहीं है तो क्या हम हिंदुस्तान के नागरिक नहीं हुए। रामविलास ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था और उसमें संशोधन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं 1974 के छात्र आंदोलन से राजनीति में आए हैं। छात्रों की अपनी भावना है। उन्हें रोक भी नहीं सकते। हम उनके बारे में धर्म के आधार पर सोचते भी नहीं हैं कि वे जामिया मिल्लिया अथवा जेएनयू के हैं।

रामविलास ने कहा कि हमलोग बचपन से यह पढते आए हैं कि वाणी में स्वतंत्रता और कर्म पर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनपीआर का सीएए से कोई संबंध नहीं है और एनआरसी केवल असम के लिए है जो 1971 से चला आ रहा है। रामविलास ने कहा कि सरकार का मानना है कि पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के इस्लामी राष्ट्र होते हुए भी वहां उसी धर्म के लोग हैं तो कैसे उन्हें अल्पसंख्यक और सताया हुआ माना जाए लेकिन 1955 के अधिनियम के तहत किसी को भी नागरिकता देने से रोका नहीं जा सकता है।

इसे भी पढ़ें: एससी, एसटी शिक्षकों का जेएनयू प्रशासन पर भेदभाव के आरोप, पासवान से दखल की अपील

राजग में शामिल जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूरे देश में एनआरसी की मुखालफत किए जाने के बारे में पूछे जाने पर रामविलास ने कहा कि एनआरसी का प्रश्न उठता ही नहीं है । जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है तो हम तीन कदम आगे क्यों जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर एनपीआर से इतनी अधिक समस्या है तो कांग्रेस ने 2010 में अपने शासनकाल के दौरान इसे क्यों नहीं उठाया। लोकसभा में राजग को बहुमत है पर राज्यसभा में हमें बहुमत नहीं है ऐसे में वहां सीएए और एनपीआर सभी के समर्थन से पारित हो पाया।

इसे भी देखें:  NPR क्या है और कैसे गिने जाएंगे नागरिक 





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।