Patna में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, छात्र संगठनों का मार्च रोका

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया और तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई गिरफ्तारियों और कथित दमन का विरोध कर रहे थे।
पटना, चार अगस्त बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे छात्र एवं युवा संगठनों के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की। प्रदर्शनकारी हाल में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन पर कथित दमन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) जैसे संगठनों के झंडे लिए छात्र कार्यकर्ता ऐतिहासिक गांधी मैदान में एकत्र हुए तथा जुलूस की शक्ल में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े।
हालांकि मुख्यमंत्री आवास से करीब दो किलोमीटर पहले आयकर गोलंबर पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘हम उन लोगों की सत्यापित सूची चाहते हैं जिन्हें जेल से रिहा कर दिया गया है और उन लोगों की भी जो पिछले महीने के छात्र आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार होने के बाद अब भी जेल में हैं।’’ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए ‘बंद’ को लागू कराने की कोशिश के आरोप में बिहार पुलिस ने करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से लगभग आधे नाबालिग पाए जाने पर उन्हें छोड़ दिया गया था, जबकि शेष को जेल भेज दिया गया था।
हालांकि बाद में, दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन के साथ जुड़ी आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की नेता नेहा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक विनय कुमार से मुलाकात की थी। इसके बाद राज्य के गृह विभाग ने सभी मामले वापस लेने और जेल में बंद विद्यार्थियों को रिहा करने की घोषणा की थी। आज यहां गांधी मैदान में मौजूद एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘सरकार का आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ है।
हमारे कई साथी अभी तक अपने घर नहीं लौटे हैं। पुलिस झूठ बोल रही है। हमें अपने साथियों की चिंता है।’’ सीवान से आए एक छात्र कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘मैं उसी जिले से हूं जहां एक पुलिसकर्मी ने विद्यार्थियों पर एके-47 राइफल से गोली चलाई थी।
संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन हम पुलिस अधीक्षक (एसपी) के खिलाफ भी कार्रवाई चाहते हैं, क्योंकि अपने अधीनस्थों को इस तरह कार्रवाई करने के लिए वही जिम्मेदार हैं।’’ आयकर गोलंबर पर, जहां प्रदर्शनकारियों को रोका गया, कई बड़े नेता भी पहुंचे। इनमें पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम शामिल थे। राजेश राम उन कुछ प्रदर्शनकारियों में शामिल थे जिन्हें पुलिस अपने वाहन में बैठाकर वहां से ले गयी।
इस अवसर पर अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अमरेंद्र कुमार झा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमें पानी की बौछार का इस्तेमाल करना पड़ा क्योंकि प्रदर्शनकारियों को निषिद्ध क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। हमने किसी को हिरासत में नहीं लिया है। प्रदर्शनकारियों में से चुने गए एक प्रतिनिधिमंडल को उनकी शिकायतें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखने में केवल सहायता की गई है।
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