PM Narendra Modi ने कहा: सतर्क रहकर दिमागी नक्सल को पहचानना और अलग करना होगा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है। उन्होंने चेताया कि अब दिमागी नक्सल हिंसा और अराजकता के नए रास्ते खोज रहे हैं, जिन्हें पहचानकर अलग-थलग करना होगा। पीएम मोदी के अनुसार चार दशक लंबे इस संघर्ष में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं और अब युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहना होगा तथा उनकी पहचान कर उन्हें अल-थलग करना होगा। मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया, अनेक माताओं से उनके बेटे छीन लिए और परिवारों के सपनों को चूर-चूर कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने चार दशक तक देश के बड़े हिस्से को दबोचकर रखा और संविधान की धज्जियां उड़ाईं।

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उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए, जबकि युद्ध में भी इतने सैनिकों की मौत नहीं होती। मोदी ने कहा, ‘‘2014 में जब हमें मौका मिला तो हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया। आज खुशी है कि नक्सलवाद के पास आखिरी सांस लेने की भी ताकत नहीं रही।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलवादियों की गोलियां चलती थीं, आज वहां नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है।

उन्होंने आगाह किया कि इस चुनौती को अभी भी कमतर नहीं आंकना चाहिए और सतर्क रहना होगा। मोदी ने कहा कि माओवादी सोच वाले लोग कभी सत्ता के गलियारों में बैठे थे और सरकारी समितियों में सलाहकार के रूप में रहकर उन्होंने नीतियों को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में ‘हथियारी नक्सल’ के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ मौके की तलाश में हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं तथा समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं। मोदी ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ को पहचानना और उन्हें अलग-थलग करना होगा तथा युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।

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