Gorantla Madhav का TDP पर वार, बोले- Tenali मामले में दिखा पुलिसिंग पर राजनीतिक दखल

YSRCP प्रवक्ता गोरंटला माधव ने टीडीपी गठबंधन सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए पुलिस का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने तेनाली मामले में अदालत के फैसले और युवकों की सार्वजनिक पिटाई का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई में राजनीतिक दखल की आलोचना की। साथ ही, उन्होंने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
YSRCP के प्रवक्ता और पूर्व सांसद गोरंटला माधव ने बुधवार को आरोप लगाया कि तेनाली मामले में ज़िला अदालत के फ़ैसले के बाद, TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार राजनीतिक मक़सद के लिए पुलिस मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर रही थी। पार्टी ऑफ़िस में मीडिया से बात करते हुए माधव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अप्रैल में तेनाली में चार युवकों पर हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया और बाद में उनमें से तीन को हिरासत में ले लिया, उन्हें सड़कों पर घुमाया और उनकी पिटाई की। मई 2025 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें पुलिसकर्मी तीन युवकों की सबके सामने पिटाई करते दिख रहे थे, जिससे मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक नेताओं ने इसकी आलोचना की। यह मामला पुलिस कॉन्स्टेबल कन्ना चिरंजीवी की शिकायत से जुड़ा था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि चार लोगों -- वेमु नवीन उर्फ़ किलर, जॉन विक्टर, डोमा राकेश और शेख़ करीमुल्ला ने 24 अप्रैल, 2025 को तेनाली के ऐथानागर के पास उन पर हमला किया था। पुलिस ने उस समय कहा था कि आरोपियों ने कॉन्स्टेबल पर हमला किया था और उनकी शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था।
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माधव ने आरोप लगाया कि युवाओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी और उन्होंने इस मामले को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने YSRCP अध्यक्ष YS जगन मोहन रेड्डी के युवाओं और उनके परिवारों से मिलने के दौरे का भी ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि बाद में गठबंधन और मीडिया के कुछ वर्गों ने इस दौरे को निशाना बनाया। कोर्ट की कार्यवाही पर प्रतिक्रिया देते हुए माधव ने कहा कि गठबंधन सरकार को यह बताना चाहिए कि राजनीतिक नेताओं को खुश करने और पुलिस विभाग को बदनाम करने के लिए पुलिस से कथित तौर पर "रेड बुक संविधान" का पालन क्यों कराया गया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कोर्ट द्वारा पुलिस केस को खारिज करना राज्य में पुलिसिंग पर राजनीतिक दखल का असर दिखाता है। माधव ने हिरासत में साईं कृष्णा की मौत का भी ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि उस मामले में भी मानवाधिकारों के उल्लंघन का ऐसा ही पैटर्न देखा गया था। उन्होंने दावा किया कि साईं कृष्णा के माता-पिता को उनकी अस्थियां तक नहीं दी गईं।
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तेनाली की घटना की पहले मानवाधिकार मंच ने आलोचना की थी और मई 2025 में एक वीडियो सामने आने के बाद जांच की मांग की थी, जिसमें पुलिसकर्मी सार्वजनिक रूप से तीन युवाओं की पिटाई करते दिख रहे थे। संगठन ने कहा कि युवाओं पर लगे आरोपों के बावजूद, पुलिस को तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। पुलिस का कहना था कि युवाओं पर कॉन्स्टेबल कन्ना चिरंजीवी के साथ मारपीट का आरोप था, और उस समय की रिपोर्टों के अनुसार उनमें से तीन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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