दक्षिण की पथरीली जमीन पर कमल खिलाने उतरे मोदी, Kerala और Tamilnadu में तेज हुआ सत्ता का संग्राम

केरल में प्रधानमंत्री ने राजधानी तिरुवनंतपुरम में भव्य रोड शो से शुरुआत की। केरल में हालिया निकाय चुनावों में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन और तिरुवनंतपुरम के मेयर पद पर काबिज होने की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर गया है।
दक्षिण की पथरीली जमीन पर कमल खिलाने के इरादे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केरल और तमिलनाडु का सघन दौरा कर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के चुनावी अभियान का शंखनाद कर दिया। दोनों राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक संकेतों से भरा रहा जहां विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास के साथ-साथ विपक्ष पर तीखे प्रहार भी किए गए।
केरल में प्रधानमंत्री ने राजधानी तिरुवनंतपुरम में भव्य रोड शो से शुरुआत की। केरल में हालिया निकाय चुनावों में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन और तिरुवनंतपुरम के मेयर पद पर काबिज होने की वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर गया है। इसी पृष्ठभूमि में मोदी ने रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई और कई विकास कार्यों की आधारशिला रखी। सार्वजनिक सभा में उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास और सुशासन के साथ केरल को नई दिशा दी जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में सत्तारुढ़ वाम मोर्चे पर निशाना साधते हुए शबरिमला में सोना गायब होने का मुद्दा तो उठाया ही साथ ही उन्होंने मुस्लिम लीग के साथ कांग्रेस के संबंधों को लेकर उस पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि वह राज्य में कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा दे रही है। रैली के दौरान एक बच्चे का प्रधानमंत्री का स्केच हाथ में उठाए लंबे समय तक खड़े रहना भी चर्चा का विषय बना। मंच से मोदी का मानवीय संवाद इस दौरे की सहज तस्वीर पेश करता दिखा।
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तमिलनाडु में प्रधानमंत्री का रुख अधिक आक्रामक रहा। एनडीए की रैली में उन्होंने सत्तारुढ़ द्रविड मुनेत्र कझगम यानि द्रमुक पर परिवारवाद, भ्रष्टाचार, महिला अपमान और तमिल संस्कृति को कमजोर करने के आरोप लगाए। मोदी ने कहा कि सत्ता की यह राह राज्य के मूल्यों और विकास को नुकसान पहुंचा रही है। इसके उलट एनडीए को उन्होंने ईमानदारी, महिला सम्मान और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित विकल्प बताया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तमिलनाडु की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का विस्तार से उल्लेख किया। संगम साहित्य, प्राचीन वैज्ञानिक परंपराएं, भव्य मंदिर और आधुनिक तकनीकी योगदान को उन्होंने भारत की सभ्यता की रीढ़ बताया। चेन्नई के निकट चेंगलपट्टु और मदुरांतकम की सभाओं में उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में तमिलनाडु की भूमिका निर्णायक होगी। केंद्र सरकार द्वारा पिछले ग्यारह वर्षों में राज्य के लिए किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की यूपीए सरकारों ने तमिलनाडु को अपेक्षित संसाधन नहीं दिए।
मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के शासन की सराहना करते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत करने का श्रेय दिया और वर्तमान दौर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। पोंगल के उत्सव और एमजी रामचंद्रन की जयंती का स्मरण कर उन्होंने स्थानीय भावनाओं से जुड़ने की कोशिश की। हर मंच से उनका संदेश साफ था कि तमिलनाडु बदलाव के लिए तैयार है।
हम आपको यह भी बता दें कि केरल में राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री ने उद्योगपति साबु एम जैकब से मुलाकात की और उनके ट्वेंटी ट्वेंटी संगठन के एनडीए में शामिल होने का स्वागत किया। वर्कला में सिवगिरि मठ और श्री नारायण गुरु परंपरा से जुड़े संतों से भेंट कर उन्होंने सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को भी रेखांकित किया।
देखा जाये तो दक्षिण भारत लंबे समय से भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। केरल और तमिलनाडु में मजबूत वैचारिक परंपराएं क्षेत्रीय अस्मिता और गठबंधन राजनीति का ऐसा ताना बाना रचती रही हैं जहां राष्ट्रीय दलों के लिए जगह बनाना आसान नहीं रहा। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह दोहरा दौरा केवल चुनावी यात्रा नहीं बल्कि रणनीतिक दांव भी है। केरल में हालिया स्थानीय निकाय सफलता ने भाजपा को यह भरोसा दिया है कि संगठन विस्तार और विकास के एजेंडे के सहारे वह अपनी जमीन बढ़ा सकती है। मोदी का रोड शो और सामाजिक संगठनों से संवाद इस बात का संकेत है कि पार्टी केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह समाज के प्रभावशाली वर्गों को साथ जोड़ने की कोशिश में भी है।
तमिलनाडु में तस्वीर और भी दिलचस्प है। यहां भाजपा अकेले दम पर नहीं बल्कि सभी विपक्षी दलों को साथ लाकर मजबूत एनडीए के रूप में मैदान में उतरना चाहती है। द्रमुक पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के हमले के साथ-साथ तमिल गौरव का सम्मान नहीं करने का आरोप बताता है कि भाजपा स्थानीय पहचान को साधने की रणनीति अपना रही है। जयललिता और एमजी रामचंद्रन जैसे लोकप्रिय चेहरों का उल्लेख कर मोदी ने उस भावनात्मक खाली जगह को भरने का प्रयास किया है जिसे द्रमुक और अन्नाद्रमुक दशकों से भुनाते रहे हैं।
फिर भी राह आसान नहीं है। तमिलनाडु में द्रमुक की मजबूत सांगठनिक पकड़ और केरल में वामपंथी परंपरा भाजपा के सामने बड़ी चुनौती बनी रहेगी। लेकिन मोदी का यह सघन दौरा यह स्पष्ट करता है कि पार्टी अब दक्षिण में हाशिये पर नहीं रहना चाहती। विकास, संस्कृति और सुशासन के त्रिकोण पर आधारित भाजपा का यह अभियान यदि जमीनी स्तर पर संगठनात्मक मजबूती के साथ आगे बढ़ता है तो पथरीली जमीन पर कमल खिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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