PNB Scam: भगोड़े Nirav Modi के सहयोगी Sandeep Mistri की जमानत याचिका मुंबई कोर्ट से खारिज

मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी संदीप मिस्त्री की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी। विशेष न्यायाधीश सुभाष करहले ने कहा कि मिस्त्री का रिकॉर्ड सबूत मिटाने से जुड़ा रहा है और रिहा होने पर वह फिर से गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
मुंबई की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े करोड़ों डॉलर के घोटाले में भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी के सहयोगी संदीप मिस्त्री को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मिस्त्री का अतीत साक्ष्यों को नष्ट करने से जुड़ा है और रिहा होने पर वह दोबारा ऐसा कर सकता है। विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश सुभाष करहले ने कहा कि मिस्त्री करीब सात साल तक फरार रहा और गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी होने तथा निर्वासन की कार्यवाही के बाद उसे दुबई में हिरासत में लिया गया।
इसके बाद उसे भारत लाया गया और मुंबई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा, ‘‘इस प्रकार, आरोपी इस मामले में बाध्यकारी परिस्थितियों के कारण पेश हुआ है। इन परिस्थितियों में, यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।’’ मिस्त्री नीरव मोदी की हांगकांग स्थित कंपनी फैंसी क्रिएशंस लिमिटेड का निदेशक रह चुका है।
विशेष लोक अभियोजक ए. लिमोसिन के माध्यम से सीबीआई ने अदालत को बताया कि मिस्त्री दुबई और हांगकांग में नीरव मोदी की मुखौटा कंपनियों का संचालन और उनके कामकाज में समन्वय करता था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि वह ‘पैनमेल’ और ‘क्रिकइन्फो’ जैसी गुप्त संचार प्रणालियों के जरिये इन कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करता था। ये प्रणालियां संदेशों को अपने आप मिटाने के लिए बनाई गई थीं, ताकि साक्ष्य छिपाए जा सकें।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि मिस्त्री ने नीरव मोदी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके तहत पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ धोखाधड़ी की गई। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि मिस्त्री ने नीरव मोदी के भाई निहाल और एक अन्य वांछित आरोपी के साथ मिलकर कर्मचारियों (दुबई में नीरव मोदी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाममात्र के निदेशकों) को भारत में मामला दर्ज होने के बाद वहां से चले जाने की धमकी दी थी। आरोप है कि उन्हें यह धमकी देकर काहिरा जाने के लिए मजबूर किया गया कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि पासपोर्ट रद्द किए जाने के कारण वह पहले भारत नहीं लौट सका था। अदालत ने जोर देकर कहा कि आरोपी और अन्य लोगों पर 23,780 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। विशेष न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि आरोपी का अतीत साक्ष्यों को नष्ट करने से जुड़ा रहा है।
अदालत ने कहा, ‘‘यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह साक्ष्य नष्ट कर सकता है। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर सकता है।’’ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नीरव मोदी, उसके मामा मेहुल चोकसी और अन्य लोगों के खिलाफ 2018 से धनशोधन के आरोपों में जांच कर रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी उनके खिलाफ जांच कर रहा है।
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