जावेद अख्तर का विवादों से है पुराना नाता, कभी RSS की तालिबान से तुलना कर तो बुर्के पर बोलते हुए दे बैठते हैं विवादित बयान

जावेद अख्तर का विवादों से है पुराना नाता, कभी RSS की तालिबान से तुलना कर तो बुर्के पर बोलते हुए दे बैठते हैं विवादित बयान
प्रतिरूप फोटो

17 जनवरी, 1945 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्में जावेद अख्तर के विचार अक्सर लोगों को पसंद नहीं आते हैं और फिर विवाद खड़ा हो जाता है। कुछ वक्त पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की तुलना तालिबान से कर दी थी तो हाल ही में बुली बाई ऐप बनाने वाले को माफी दिए जाने की अपील करने लगे।

अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियां बटोरने वाले मशहूर गीतकार जावेद अख्तर आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबे संघर्ष के बाद अपना अलग ही मुकाम हासिल किया है। 17 जनवरी, 1945 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्में जावेद अख्तर के विचार अक्सर लोगों को पसंद नहीं आते हैं और फिर विवाद खड़ा हो जाता है। कुछ वक्त पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की तुलना तालिबान से कर दी थी तो हाल ही में बुली बाई ऐप बनाने वाले को माफी दिए जाने की अपील करने लगे। जिसकी वजह से उनकी चौतरफा आलोचना होती रहती है। 

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जब तालिबान से की RSS की तुलना

मशहूर गीतकार ने आरएसएस की तुलना तालिबान से करते हुए कहा था कि पूरी दुनिया में दक्षिणपंथियों में एक अनोखी समानता है, जैसे कि तालिबान मुस्लिम राष्ट्र चाहता है...ऐसे भी लोग हैं जो हिन्दू राष्ट्र चाहते हैं... इन लोगों की मानसिकता एक ही है। फिर चाहे वो मुस्लिम हों, क्रिस्चियन हों, ज्यूव्स हों या फिर हिन्दू... जावेद अख्तर के इस बयान से पूरे देश में बवाल मच गया और नेताओं से लेकर सोशल मीडिया तक में उनकी आलोचना होने लगी। इस पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा था कि आप कैसे कह सकते हैं कि हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा का समर्थन करने वाले तालिबानी मानसिकता के हैं ? हम इससे सहमत नहीं हैं। हिन्दूत्व की तालिबान से तुलना करना हिन्दू संस्कृति का अपमान है।

बुर्के वाले बयान से भी मचा था बवाल

इससे पहले बुर्का को लेकर दिए गए बयान पर भी बवाल मचा था। उन्होंने कहा था कि अगर बुर्के पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो राजस्थान में घूंघट पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के समय उन्होंने कहा था कि देश में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार राजस्थान में मतदान से पहले घूंघट पर भी प्रतिबंध लगाए। हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए इसे तोड़-मरोड़कर पेश करने की बात कही थी। दरअसल, शिवसेना ने बुर्के को लेकर एक सवाल पूछा था, जिस पर उन्होंने ईरान और श्रीलंका का उदाहरण देते हुए अपनी बात कही थी।

कंगना के साथ अक्सर होती है तू-तू मैं-मैं

मशहूर गीतकार ही महज विवादों की वजह से सुर्खियों में नहीं रहते हैं बल्कि कंगना रनौत भी अक्सर बयानों के चलते सुर्खियां बटोरती हैं और कई मौकों पर तो दोनों के बीच में ही घमासान मचा रहता है। जिसकी वजह से जमकर हंगामा होता है। एक बार ऋतिक से जुड़े मामले पर उन्होंने कंगना से कहा था कि मैं सुलह कराने में मदद कर सकता हूं। हालांकि कंगना ने कहा था कि वो अपने तरीके से मामले को सुलझा लेंगी। लेकिन विवाद यहीं पर खत्म नहीं हुआ था इस पर काफी बवाल मचा था। 

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PM मोदी की चुप्पी पर उठाया था सवाल

विवादित बुली बाई ऐप मामले को लेकर जावेद अख्तर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि वह इन मुद्दों पर चुप्पी को लेकर हैरान हैं। सैकड़ों महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी हो रही है। तथा-कथित धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है, सेना, पुलिस और जनता को 20 करोड़ हिन्दुस्तानियों का संहार करने को कहा जा रहा है। इन मुद्दों पर मैं खुद की और खास तौर से प्रधानमंत्री सहित सभी की चुप्पी से हैरान हूं। क्या यही है सबका साथ ? हालांकि बाद में जावेद अख्तर ने बुली बाई ऐप की साजिशकर्ता लड़की को माफ करने की अपील भी की थी। क्योंकि उस लड़की ने कैंसर से अपनी मां और कोरोना में अपने पिता को खो दिया था।





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